हरियाणा के किसानों की मौज: धान छोड़ें और पाएं ₹8,000 प्रति एकड़, 'मेरा पानी-मेरी विरासत' योजना में आवेदन शुरू
May 22, 2026 4:25 PM
हरियाणा। हरियाणा के कई ब्लॉक डार्क जोन में तब्दील हो चुके हैं, जहाँ टयूबवेलों ने पानी की जगह हवा उगलना शुरू कर दिया है। इस गंभीर संकट को देखते हुए सूबे की सरकार ने धान की पारंपरिक खेती को हतोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का सहारा लिया है। 'मेरा पानी-मेरी विरासत' योजना इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। सरकार का सीधा गणित है— किसान पानी बचाएं, सरकार उनकी जेब भरेगी।
इस योजना के तहत यदि कोई किसान अपने उस खेत में धान नहीं लगाता जहाँ वह पिछले साल तक चावल उगा रहा था, तो उसे सीधा आर्थिक लाभ दिया जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि धान की जगह मक्का, कपास, खरीफ दलहन (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन) या तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली) उगाने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा।
खेत खाली रखने पर भी मिलेंगे पैसे, बागवानी और चारे को भी तरजीह
इस योजना की सबसे दिलचस्प और व्यावहारिक कड़ी यह है कि यदि कोई किसान चालू खरीफ सीजन के दौरान अपने खेत में कोई फसल नहीं उगाता और उसे खाली छोड़ देता है, तो भी वह इस 8,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि का हकदार होगा। इसके अलावा, जो किसान पारंपरिक फसलों से हटकर खरीफ प्याज, सब्जियां, चारे की फसलें या फिर कृषि वानिकी (पॉपलर और सफेदा) की तरफ रुख करेंगे, उन्हें भी इस स्कीम के दायरे में रखकर पुरस्कृत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पानी बचेगा, बल्कि मिट्टी की सेहत में भी सुधार होगा।
बोनस की बौछार: ढैंचा उगाने और सीधी बिजाई पर भी सरकारी मदद
कृषि विभाग ने इस बार प्रोत्साहन के कई लेयर्स तैयार किए हैं। अगर कोई किसान दलहन, तिलहन या कपास चुनता है, तो उसे 8 हजार के मूल अनुदान के ऊपर 2,000 रुपये प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस मिलेगा, यानी कुल फायदा 10 हजार रुपये तक पहुंच जाएगा।
यही नहीं, जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए हरी खाद के तौर पर 'ढैंचा' उगाने वाले किसानों को सरकार 1,000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी दे रही है। वहीं, जो किसान धान की खेती पूरी तरह नहीं छोड़ पा रहे हैं, उनके लिए डीएसआर (Direct Seeded Rice) यानी कद्दू किए बिना सीधे धान की बिजाई करने की तकनीक पर भी सरकार वित्तीय प्रोत्साहन दे रही है, क्योंकि इस विधि में पानी की खपत करीब 25 से 30 फीसदी तक कम हो जाती है।
जेब में कैसे आएंगे पैसे? जानिए ऑनलाइन आवेदन का तरीका
योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कागजी कार्रवाई को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रखा है। हरियाणा के किसी भी जिले का किसान 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकता है।
आवेदन के बाद कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम सैटेलाइट और फिजिकल वेरिफिकेशन (सत्यापन) के जरिए आपके दावों की जांच करेगी। हरी झंडी मिलते ही प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। जानकारों का मानना है कि यदि यह योजना जमीन पर पूरी तरह कामयाब रही, तो यह हरियाणा के कृषि परिदृश्य और पर्यावरण दोनों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है।