हरियाणा सरकार का बेटियों को तोहफा: शादी पर मिल रहे ₹71,000
Mar 13, 2026 3:00 PM
हरियाणा। चंडीगढ़ और हरियाणा के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए 'मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना' एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि गरीबी अब किसी बेटी की शादी में बाधा नहीं बनेगी। कुरुक्षेत्र समेत प्रदेश के सभी जिलों में प्रशासन ने इस योजना को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। जिला उपायुक्त अभिषेक मीणा के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करना है, ताकि वे सम्मान के साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी कर सकें।
जाति और श्रेणी के हिसाब से तय है शगुन की राशि
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें समाज के हर जरूरतमंद वर्ग का ध्यान रखा गया है। अनुसूचित जाति, विमुक्त जाति और टपरीवास जाति के वे परिवार जिनकी आय 1.80 लाख रुपये तक है, उन्हें सरकार की ओर से 71 हजार रुपये का शगुन दिया जा रहा है। वहीं, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के पात्र परिवारों को 41 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी ताकि बिचौलियों की गुंजाइश न रहे।
खिलाड़ी बेटियों और दिव्यांगों के लिए भी विशेष प्रावधान
योजना का दायरा केवल जातिगत आधार तक सीमित नहीं है। प्रदेश की महिला खिलाड़ियों को उनके गौरवशाली प्रदर्शन के सम्मान स्वरूप शादी पर 41 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, अगर शादी करने वाला जोड़ा दिव्यांग है, तो उन्हें 51 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। यदि पति-पत्नी में से कोई एक दिव्यांग है, तो 41 हजार रुपये दिए जाएंगे। विधवाओं, निराश्रित महिलाओं और अनाथ बच्चों की शादी के लिए भी सरकार ने 51 हजार रुपये की सम्मानजनक राशि तय की है।
6 महीने की डेडलाइन और जरूरी शर्तें
योजना का लाभ लेने में सबसे बड़ी अड़चन अक्सर जानकारी का अभाव होती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शादी संपन्न होने के 6 महीने के भीतर विवाह का पंजीकरण (Marriage Registration) करवाना कानूनी और आर्थिक दोनों रूप से अनिवार्य है। यदि इस समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया, तो अनुदान राशि रुक सकती है। आवेदन के समय परिवार पहचान पत्र (PPP), आधार कार्ड और आय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दुरुस्त होने चाहिए ताकि वेरिफिकेशन में देरी न हो।