NCR Re-Scheduling: हरियाणा का 60% हिस्सा एनसीआर से होगा बाहर? दिल्ली में आज खट्टर की अध्यक्षता में बड़ी बैठक
Jun 16, 2026 11:20 AM
हरियाणा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के भौगोलिक ढांचे को लेकर आज दिल्ली में एक बेहद अहम मोड़ आने वाला है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की आज होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इसके दायरे को दोबारा तय करने (रीशेड्यूलिंग) के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। इस बैठक की कमान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के हाथों में होगी। अगर इस बैठक में नए फॉर्मूले पर सहमति बन जाती है, तो हरियाणा का करीब 60 प्रतिशत इलाका एनसीआर के नक्शे से साफ हो जाएगा। सरकार का नया प्रस्ताव दिल्ली के राजघाट को केंद्र मानकर उसके चारों तरफ सिर्फ 100 किलोमीटर के रेडियस तक ही एनसीआर की सीमा को सीमित करने का है।
14 से घटकर सिर्फ 9 जिलों तक सिमट सकता है दायरा, महेंद्रगढ़-जींद पर सबसे ज्यादा मार
मौजूदा व्यवस्था के तहत हरियाणा के कुल 14 जिले एनसीआर का हिस्सा हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 25,327 वर्ग किलोमीटर बैठता है। नया नियम लागू होते ही यह दायरा सिकुड़कर महज 10,546 वर्ग किलोमीटर पर आ जाएगा। इस बदलाव की सबसे तगड़ी मार महेंद्रगढ़ और जींद जिलों पर पड़ने जा रही है, क्योंकि इन दोनों ही जिलों का एक बड़ा हिस्सा 100 किलोमीटर की तय सीमा से काफी दूर निकल जाता है। इसके अलावा भिवानी और चरखी दादरी के भी कई इलाके इस दायरे से बाहर हो जाएंगे। हालांकि, पूरे के पूरे जिलों को बाहर रखने के इस गणित के बीच जमीन पर कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें भी खड़ी होने की आशंका है।
हाईवे कॉरिडोर से बचाने की जुगत, सीनियर एडवोकेट ने दी नए मॉडल की सलाह
इस बड़े बदलाव से अपने शहरों को बचाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बीच का रास्ता भी सुझाया है। सरकार का प्रस्ताव है कि एनसीआर के भीतर कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए सूबे से गुजरने वाले 11 राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवेज) के दोनों तरफ एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर घोषित कर उसे एनसीआर में ही रखा जाए। अगर इस तरकीब को मंजूरी मिलती है, तो नेशनल हाईवे-44 पर बसे करनाल और पानीपत के शहरी इलाकों को बड़ी राहत मिल जाएगी। इस मुद्दे पर सीनियर एडवोकेट अमित राठी का कहना है कि जो जिले एनसीआर से बाहर होंगे, वहां रियल एस्टेट और निवेश को झटका लग सकता है। ऐसे में राज्य सरकार को रोजगार और उद्योगों को थामे रखने के लिए अभी से एक समानांतर विकास मॉडल तैयार करना होगा।
राजनीति का पहिया: कभी खट्टर ने खुद दिलवाया था दर्जा, फिर खुद ही पैरवी कर रहे बाहर करने की
एनसीआर के इस पूरे विवाद के पीछे हरियाणा की राजनीति और प्राथमिकताओं का एक दिलचस्प यू-टर्न भी छिपा हुआ है। साल 2015 में जब मनोहर लाल खट्टर ने पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने करनाल और जींद को एनसीआर में शामिल करवाना अपनी सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी बताया था। उस वक्त हरियाणा का करीब 57 फीसदी हिस्सा एनसीआर में आ गया था। मगर, महज छह साल बाद दिसंबर 2021 में खट्टर के सुर पूरी तरह बदल गए।
उन्होंने सार्वजनिक मंचों से तर्क दिया कि दिल्ली से 100 किलोमीटर से ज्यादा दूर बैठे जिलों को एनसीआर के कड़े नियमों और पाबंदियों (जैसे निर्माण कार्य और प्रदूषण के कड़े नियम) का नुकसान तो उठाना पड़ रहा है, लेकिन विकास के नाम पर उन्हें कोई खास बजट या फायदा नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि आज उनकी ही मौजूदगी में इस विदाई के प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा होने जा रही है।