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हरियाणा में 10 नई IMT, किसानों को जमीन के बदले मिलेंगे मुआवजे के 3 विकल्प, जानें पूरी नीति

May 02, 2026 5:35 PM

हरियाणा। हरियाणा को देश का सबसे बड़ा 'इंडस्ट्रियल हब' बनाने की दिशा में नायब सैनी सरकार ने एक बेहद निर्णायक कदम उठाया है। राज्य में औद्योगिक विकास की गति को रफ्तार देने और 10 नई औद्योगिक टाउनशिप (IMT) विकसित करने के लिए सरकार ने अपनी लैंड पूलिंग पॉलिसी में बड़े बदलावों पर मुहर लगा दी है। इस संशोधित नीति की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अब सरकार जमीन अधिग्रहण के पुराने ढर्रे को छोड़कर किसानों को विकास में 'साझेदार' बनाने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री नायब सैनी और उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस नई नीति पर सहमति बनी है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

मुआवजे का 'ट्रिपल ऑफर': किसान खुद चुनेंगे अपना भविष्य

ई-भूमि पोर्टल पर दरों को लेकर उठने वाले विवादों और कानूनी अड़चनों को खत्म करने के लिए सरकार ने किसानों के सामने तीन स्पष्ट विकल्प रखे हैं:

50% हिस्सेदारी का विकल्प: यदि किसान चाहता है कि वह प्रोजेक्ट का हिस्सा बने, तो उसे उसकी जमीन के बदले विकसित की गई औद्योगिक भूमि पर 50% का मालिकाना हक मिलेगा। यह उन किसानों के लिए फायदे का सौदा है जो भविष्य में अपनी जमीन की बढ़ती कीमतों का लाभ उठाना चाहते हैं।

बाजार दर पर नकद भुगतान: जो किसान खेती छोड़कर व्यापार या अन्य निवेश करना चाहते हैं, वे मौजूदा बाजार दर (Market Rate) के हिसाब से एकमुश्त मुआवजा लेकर अपनी जमीन सरकार को सौंप सकते हैं।

विकसित प्लॉट का विकल्प: तीसरे विकल्प के तौर पर किसान किसी अन्य स्थान पर 1200 वर्ग मीटर का विकसित प्लॉट ले सकेंगे। इसे वे अपनी सुविधा अनुसार दो-तीन हिस्सों में या एकमुश्त बड़े प्लॉट के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।

जींद में बनेगा प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक गलियारा

सरकार की योजना प्रदेश के उन कोनों तक उद्योग पहुँचाने की है, जो अब तक पिछड़े माने जाते थे। प्रस्तावित 10 नई IMT अंबाला, नारायणगढ़, जींद, सिरसा, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, नारनौल, सोहना और पलवल में स्थापित की जाएंगी।

इनमें सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जींद में आकार लेगा। दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे और NH-152D के संगम पर करीब 12 हजार एकड़ जमीन पर यह मेगा इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट हरियाणा की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देगा।

नारायणगढ़ के किसानों ने दिखाई हरी झंडी

नई नीति का असर धरातल पर दिखना भी शुरू हो गया है। हाल ही में नारायणगढ़ क्षेत्र के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी करीब 450 एकड़ जमीन देने पर सहमति जता दी है। सरकार ने यहाँ लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ का रेट निर्धारित किया है। किसानों का यह सकारात्मक रुख सरकार के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि अक्सर जमीन अधिग्रहण ही बड़ी परियोजनाओं में सबसे बड़ा रोड़ा साबित होता रहा है।

सरकार का विजन: विवाद मुक्त विकास

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, इस संशोधित पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य सरकार, उद्योग और किसान—तीनों के हितों में सामंजस्य बैठाना है। जब किसान को लगेगा कि वह विकास में बाधा नहीं बल्कि हिस्सेदार है, तो जमीन संबंधी विवाद स्वतः ही खत्म हो जाएंगे। यह नीति न केवल उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि ग्रामीण अंचलों में रोजगार के नए द्वार भी खोलेगी।

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