हरियाणा को कुपोषण मुक्त बनाने का मास्टरप्लान: दूध उपहार योजना के लिए 170 करोड़ रुपये जारी
Apr 10, 2026 1:36 PM
हरियाणा। हरियाणा की आने वाली नस्लों को तंदुरुस्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अब मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2026-27 के अंत तक राज्य से गंभीर कुपोषण (Severe Malnutrition) का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को रफ्तार देने के लिए 'मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना' के तहत 170 करोड़ रुपये के विशेष बजट को हरी झंडी दे दी गई है। चंडीगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय कन्वर्जेंस कमेटी की सातवीं बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्पष्ट किया कि पोषण मिशन की सफलता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ 'अंतिम छोर' पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना अनिवार्य है।
पंचायतों की सक्रियता और महिला नेतृत्व पर भरोसा
मुख्य सचिव ने इस लड़ाई में स्थानीय स्तर पर बदलाव लाने के लिए एक नई रणनीति पेश की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम सभा की बैठकों में पोषण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं। इस मुहिम की सबसे खास बात यह है कि इसमें महिला पंचों और सरपंचों को 'परिवर्तन के प्रमुख वाहक' (Change Agents) के रूप में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि जमीनी स्तर पर महिलाएं ही परिवार के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से समझती हैं, इसलिए उनकी भागीदारी से समुदाय के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना आसान होगा।
योग और आयुष से मिलेगा 'सुपर पोषण'
बैठक में केवल आहार ही नहीं, बल्कि समग्र जीवनशैली पर भी ध्यान देने की बात कही गई। मुख्य सचिव ने आयुष विभाग के साथ तालमेल बिठाकर आंगनवाड़ी केंद्रों पर मासिक 'योग दिवस' आयोजित करने और वहां 'पोषण वाटिकाएं' विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बागवानी विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्थानीय स्तर पर मौसमी फलों और सब्जियों की खेती को बढ़ावा दें। वहीं, एनीमिया (खून की कमी) से निपटने के लिए बच्चों और महिलाओं को आयरन एवं फॉलिक एसिड की खुराक देने की व्यवस्था को और अधिक पुख्ता किया जाएगा।
डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता: 9.46 लाख बच्चों को सीधा लाभ
महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बैठक में बताया कि विभाग अब तकनीक का सहारा लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रहा है। 'पोषण ट्रैकर' और 'फेस रिकग्निशन प्रणाली' के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पोषण सहायता सही हाथों में पहुंचे। वर्तमान में राज्य के करीब 15,900 आंगनवाड़ी केंद्रों का विद्युतीकरण हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लगभग 9.46 लाख बच्चों और 2.56 लाख गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दैनिक पोषण सहायता दी जा रही है।
आगामी कार्ययोजना में पूरक आहार, स्तनपान को बढ़ावा देने और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल पर विशेष फोकस रहेगा, ताकि हरियाणा का हर बच्चा स्वस्थ और सशक्त बन सके।