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बहादुरगढ़ में बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश: 50 नवजात बेचे, फेसबुक पर होता था सौदा

Apr 10, 2026 3:29 PM

बहादुरगढ़।  बहादुरगढ़ पुलिस ने ममता को शर्मसार करने वाले एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके कारनामे सुनकर रूह कांप जाए। पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक बड़े रैकेट को तोड़ते हुए एक महिला सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं—यह गिरोह अब तक 50 से ज्यादा नवजात बच्चों को अलग-अलग राज्यों में बेच चुका है। पुलिस ने इस गिरोह के चंगुल से दो मासूमों को सुरक्षित छुड़ा लिया है, जिन्हें फिलहाल बाल कल्याण विभाग की देखरेख में भेजा गया है।

2 लाख में खरीद और 10 लाख में सौदा: ऐसे चलता था 'काला धंधा'

एसीपी क्राइम प्रदीप नैन ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम करता था। तस्कर गरीब परिवारों या अन्य मजबूरियों का फायदा उठाकर बच्चों को करीब 2 से सवा 2 लाख रुपये में खरीदते थे। इसके बाद इन बच्चों की 'कीमत' कई गुना बढ़ जाती थी। गिरोह निसंतान दंपतियों की मजबूरी का फायदा उठाता और उन्हें 9 से 10 लाख रुपये में बच्चा बेच देता था। पुलिस ने उन दो पिताओं को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने चंद रुपयों की खातिर अपने ही खून का सौदा कर दिया था।

इंस्टाग्राम और फेसबुक बने तस्करी के नए हथियार

अपराध के इस हाई-टेक दौर में इन तस्करों ने सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया था। यह गिरोह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहता था और निसंतान दंपतियों को टारगेट करता था। सोशल मीडिया के जरिए ही ग्राहकों से संपर्क साधा जाता और सौदेबाजी तय होती थी। गिरोह का जाल केवल हरियाणा तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इनके गुर्गे सक्रिय थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से तस्करी में इस्तेमाल की जाने वाली दो गाड़ियां और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।

सरगना 'लाडी' की तलाश, पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी

पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पंजाब निवासी 'लाडी' का नाम सामने आया है, जो इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। लाडी फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसकी तलाश में पंजाब और अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। एसीपी प्रदीप नैन का कहना है कि यह एक बड़ा संगठित अपराध है और पुलिस इस नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार किसी बड़े अस्पताल या नर्सिंग होम से तो नहीं जुड़े हैं।

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