पुराने टैक्स विवादों से मिलेगी मुक्ति, हरियाणा सरकार ने बढ़ाई एकमुश्त निपटान योजना की तारीख
Jun 02, 2026 11:01 AM
डेस्क। हरियाणा के व्यापारी वर्ग को पुराने टैक्स विवादों और मुकदमों के फेर से निकालने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी 'एकमुश्त निपटान योजना-2026' (One-Time Settlement Scheme) की समय सीमा को आगामी 28 सितंबर 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है। इस नीति का सीधा मकसद सालों से लटके कर संबंधी विवादों का स्थायी समाधान करना है, ताकि अदालतों और विभागों में लंबित मुकदमों का बोझ कम हो सके और कारोबारियों को मानसिक व वित्तीय राहत मिल सके। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, इस योजना की संशोधित कड़ियां 1 जून 2026 से पूरे सूबे में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई हैं।
1 लाख तक का टैक्स पूरी तरह ऑटो-माफ, नहीं करना होगा कोई आवेदन
इस योजना की सबसे खास बात छोटे व्यापारियों को मिलने वाली सहूलियत है। नए प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यापारी पर किसी एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है, तो उसे दफ्तरों के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ऐसे सभी मामलों में बकाया टैक्स, उस पर लगा ब्याज और जुर्माना बिना किसी औपचारिकता या आवेदन के सीधे तौर पर स्वतः (ऑटोमैटिक) माफ कर दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले से सूबे के हजारों छोटे दुकानदारों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को बिना किसी कागजी कार्रवाई के सीधे तौर पर राहत मिलनी तय है।
बड़े बकाएदारों को टैक्स में 70% की छूट, पेनल्टी और ब्याज हुए पूरी तरह खत्म
वहीं, जिन मामलों में टैक्स की देनदारी 1 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए भी सरकार ने उदार रुख अपनाया है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम 1973 के दायरे में आने वाले इन मामलों में व्यापारियों को मूल टैक्स राशि पर 70 फीसदी तक की भारी छूट देने का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, योजना का लाभ उठाने वाले इन सभी पात्र व्यापारियों को सबसे बड़ा फायदा ब्याज और जुर्माने के मोर्चे पर मिलेगा। सरकार ने पुराने बकाए पर लगने वाले ब्याज और पेनल्टी को 100 फीसदी यानी पूरी तरह माफ कर दिया है, जिससे व्यापारियों की कुल देनदारी का ग्राफ बेहद नीचे आ गया है।
व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने की कोशिश, खत्म होगा मुकदमों का बोझ
जानकारों का मानना है कि इस योजना की अवधि बढ़ाने से उन व्यापारियों को एक और जीवनदान मिला है जो तकनीकी कारणों या नकदी के संकट की वजह से पहले आवेदन नहीं कर पाए थे। विभाग के चक्कर काटने और सालों साल मुकदमे लड़ने में बर्बाद होने वाली ऊर्जा और पैसे को अब व्यापारी अपने कारोबार को बढ़ाने में लगा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस कदम से जहां एक तरफ राज्य में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) का माहौल और मजबूत होगा, वहीं दूसरी तरफ सरकार को भी लंबे समय से फंसे राजस्व का एक बड़ा हिस्सा आसानी से वापस मिल सकेगा।