हरियाणा में कुदरत का कहर: बारिश और तूफान ने उजाड़े किसानों के अरमान, गेहूं-सरसों की फसल बर्बाद
Mar 20, 2026 4:18 PM
हरियाणा। साल भर पसीना बहाकर जिस फसल को किसान 'सोना' मानकर घर ले जाने की तैयारी में था, कुदरत की एक मार ने उसे मिट्टी में मिला दिया है। हरियाणा के भिवानी और चरखी दादरी जिलों में पिछले 72 घंटों से रुक-रुक कर हो रही बारिश और बर्फीली हवाओं ने रबी सीजन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। हालात यह हैं कि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह जमीन चूम चुकी है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट और दानों की गुणवत्ता खराब होने का डर सता रहा है।
खेतों में जलभराव, सरसों की फसल को सबसे ज्यादा चोट
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 1 लाख 55 हजार एकड़ में सरसों और 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई थी। सरसों की कटाई का काम कई जगह शुरू हो चुका था, लेकिन बारिश ने कटी हुई फसल को भी भिगो दिया है। वहीं, खड़ी सरसों के फूल झड़ने से तेल की मात्रा कम होने की संभावना है। मौसम विभाग की ताजा चेतावनी ने किसानों की धड़कनें और बढ़ा दी हैं, जिसमें आने वाले कुछ घंटों में ओलावृष्टि और भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।
"60 हजार रुपये एकड़ दे सरकार"—किसानों का फूटा गुस्सा
फसलों की बर्बादी देख किसानों का धैर्य जवाब दे गया है। भिवानी में अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि सरकार 'फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल' को तुरंत दोबारा खोले और विशेष गिरदावरी करवाकर 60 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दे। किसान सभा के उपप्रधान कामरेड ओमप्रकाश ने कहा, "पहले खरीफ की फसल खराब हुई और अब रबी पर कुदरत का प्रहार हुआ है। अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो किसान कर्ज के दलदल में डूब जाएगा।"
प्रशासन की तैयारी: ग्राउंड जीरो पर पहुंचे अधिकारी
नुकसान के शोर के बीच प्रशासन भी हरकत में आया है। कृषि अधिकारी चंद्रभान श्योराण ने बताया कि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर डेटा जुटा रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले चार दिनों के भीतर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी, जिसके आधार पर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में ड्रेनेज की व्यवस्था की जा रही है ताकि फसल को और गलने से बचाया जा सके।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर पर फसल गिरने (Lodging) से पौधों को पोषण मिलना बंद हो जाता है। यदि धूप जल्दी नहीं खिली, तो नमी के कारण दानों में कवक (Fungus) लग सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बीमा पॉलिसियों के तहत 72 घंटों के भीतर कंपनी को सूचित करें ताकि क्लेम मिलने में आसानी हो। फिलहाल, आसमान में छाए काले बादल और किसानों के चेहरों की मायूसी एक ही दास्तां बयां कर रही है।