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यमुना जल विवाद पर दिल्ली में बड़ी बैठक: हरियाणा और राजस्थान के बीच पाइपलाइन बिछाने पर बनी सहमति

May 13, 2026 10:44 AM

हरियाणा। यमुना के पानी को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच जो खींचतान पिछले 20-30 सालों से फाइलों में दबी थी, वह अब समाधान की ओर बढ़ती दिख रही है। देश की राजधानी में आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मध्यस्थता में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा हथिनीकुंड बैराज से मानसून के दौरान बहने वाले 'सरप्लस' (अतिरिक्त) पानी को राजस्थान के प्यासे जिलों तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में होने वाली इस चर्चा में उन तकनीकी अड़चनों को दूर किया जा रहा है, जो सालों से इस प्रोजेक्ट की राह में रोड़ा बनी हुई थीं।

मानसून का पानी बनेगा वरदान: 4 पाइपलाइनों का ब्लूप्रिंट तैयार

इस पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा है हथिनीकुंड बैराज से निकलने वाली चार पाइपलाइनें। तकनीकी विशेषज्ञों के सुझाव के बाद तय किया गया है कि बैराज की जल संग्रहण क्षमता से जो भी पानी अतिरिक्त होगा, उसे व्यर्थ बहने देने के बजाय पाइपलाइनों के जरिए स्टोर किया जाएगा। इनमें से तीन लाइनें राजस्थान के हिस्से आएंगी, जबकि एक पाइपलाइन के जरिए दक्षिण हरियाणा के उन क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाएगा जहां जमीन के नीचे का जलस्तर काफी नीचे जा चुका है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने करीब 11 महीने पहले इस पहल की नींव रखी थी, जिसे अब वर्तमान सरकार अंजाम तक पहुंचाने में जुटी है।

राजनीति नहीं, विकास का रास्ता: दिल्ली के पानी पर कोई आंच नहीं

हरियाणा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान के साथ होने वाले इस समझौते का असर दिल्ली को मिलने वाले पानी पर कतई नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार दिल्ली के हिस्से का पानी यथावत जारी रहेगा। इस समझौते से राजस्थान के सीकर, झुंझुनू और चूरू जैसे जिलों की तकदीर बदल सकती है, जहां पीने के पानी का भारी संकट है। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा में 'सेम' (जलभराव) की समस्या के समाधान के लिए भी केंद्र से तकनीकी टीम भेजने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि एक बार 'डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट' (DPR) फाइनल होने के बाद इस पर युद्ध स्तर पर काम शुरू हो जाएगा।

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