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हरियाणा में राशन डिपो पर बिकेगी जैविक खाद, 33% डिपो महिलाओं के लिए आरक्षित

Mar 07, 2026 1:59 PM

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राशनकार्ड धारकों और किसानों से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। चंडीगढ़ में सदन को संबोधित करते हुए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने बताया कि राज्य में संचालित 9,408 राशन डिपो की संख्या बढ़ाकर 13,408 की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत इन डिपो में से 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे, जिससे प्रदेश की महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और राशन वितरण प्रणाली भी मजबूत होगी।

गुरुग्राम, रोहतक, हिसार, करनाल और पानीपत जैसे जिलों में बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर निर्भर हैं। डिपो की संख्या बढ़ने से इन शहरों और आसपास के गांवों में राशन वितरण का दबाव कम होगा और लोगों को अपने इलाके में ही सुविधा मिल सकेगी।

33 प्रतिशत राशन डिपो महिलाओं के लिए आरक्षित

खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने सदन में बताया कि नई योजना के तहत कुल डिपो में से 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को सीधा फायदा मिलेगा।

सरकार का मानना है कि महिलाओं को डिपो संचालन से जोड़ने से परिवारों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी मजबूत होंगी। इससे महिला समूहों की भागीदारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बढ़ेगी।

राशन डिपो से अब बिकेगी जैविक खाद

राज्य सरकार ने राशन डिपो संचालकों की आय बढ़ाने के लिए एक और व्यवस्था तैयार की है। अब डिपो पर 5-5 किलोग्राम के पैकेट में जैविक खाद भी बेची जा सकेगी। इससे गांवों में जैविक खाद बनाने वाले किसान और पशुपालकों को पास में ही बाजार मिलेगा। उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए शहरों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्थानीय स्तर पर ही खरीदार मिल सकेंगे।

किसानों को गांव में ही मिलेगी जैविक खाद

डिपो के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली जैविक खाद मानक तय कर तैयार की जाएगी। इससे खेती में रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के तौर पर किसानों को जैविक खाद आसानी से मिल सकेगी। गांवों में रहने वाले किसान सीधे अपने इलाके के राशन डिपो से खाद खरीद सकेंगे। इससे खेती की लागत और परिवहन खर्च दोनों कम होने की उम्मीद है।

स्वयं सहायता समूहों को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना में स्वयं सहायता समूहों और सीएम पैक्स संचालन समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर स्थानीय समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है।

डिपो संचालकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर उनकी आय बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही खेती में रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग और जैविक खाद को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह कदम अहम माना जा रहा है।

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