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Haryana Sikh Jatha: हरियाणा सिख जत्थे को वाघा बॉर्डर पर क्यों रोका गया? सामने आई प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी इनसाइड स्टोरी

Jun 11, 2026 11:46 AM

हरियाणा। गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी गुरुपर्व के पवित्र मौके पर पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की चौखट पर माथा टेकने का सपना संजोए हरियाणा के सिख श्रद्धालुओं को भारी निराशा हाथ लगी है। महीनों की तैयारियों, जेब से खर्च हुए पैसे और हाथों में वैध वीजा होने के बाद भी इन श्रद्धालुओं का सफर भारत-पाकिस्तान की सीमा यानी वाघा बॉर्डर पर ही थम गया। हैरानी की बात यह रही कि जहां एक तरफ दिल्ली और पंजाब से आए अन्य श्रद्धालु औपचारिकताएं पूरी कर मजे से सीमा पार कर गए, वहीं हरियाणा के 94 श्रद्धालुओं का जत्था पूरे दिन सिर्फ एक अंतिम सरकारी अनुमति की आस में बॉर्डर पर आंखें बिछाए बैठा रहा। अंततः शाम को जब उम्मीद की आखिरी किरण भी टूट गई, तो भारी मन से इन श्रद्धालुओं को वापस लौटना पड़ा।

कुरुक्षेत्र से शुरू हुआ था सफर, करतारपुर साहिब में टेकना था माथा

इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत बीते मंगलवार यानी 9 जून को कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही से अरदास के साथ हुई थी। पूरे प्रदेश से जुटे इन 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब, डेरा साहिब और पंजा साहिब समेत कई अन्य पवित्र गुरुधामों के दर्शन करने थे। बुधवार को यह जत्था अमृतसर के डेरा संत गुरुदेव सिंह कुल्ली वाले में रुका हुआ था और आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी का इंतजार कर रहा था। लेकिन जैसे-जैसे सूरज ढलता गया, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की उम्मीदें भी ढलती गईं। इस बड़ी प्रशासनिक चूक के बाद अब गुस्साए श्रद्धालुओं ने सीधे तौर पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

कागजी कार्रवाई की कछुआ चाल और ऐन वक्त पर तबादले ने बिगाड़ा खेल

भीतरखाने से छनकर आ रही जानकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में लापरवाही की एक लंबी कड़ियाँ जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान यात्रा को लेकर 1 जून को ही राज्य के सभी उपायुक्तों (DC) के पास आधिकारिक नोटिफिकेशन पहुंच चुका था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपने जरूरी दस्तावेज, पासपोर्ट और तय फीस कमेटी के मुख्य दफ्तर में जमा भी करवा दिए थे। 2 जून को यात्रा एवं आईटी इंचार्ज हरकीरत सिंह ने सभी जिलों के डीसी को यात्रियों की लिस्ट ईमेल कर दी और पासपोर्ट दिल्ली स्थित पाक दूतावास भेज दिए। लेकिन खेल तब बिगड़ा जब 6 जून को अचानक हरकीरत सिंह का तबादला सिरसा के गुरुद्वारा 10वीं पातशाही में कर दिया गया। उनके जाते ही पूरी व्यवस्था डगमगा गई और जिम्मेदारी नए सुपरवाइजरों के कंधों पर आ गई, जो नए-नए सेटअप में तालमेल नहीं बिठा पाए।

चंडीगढ़ में चलती रही सिफारिशें, पर बॉर्डर पर रह गई कसर

पूरी चूक तब उजागर हुई जब यह पता चला कि कुछ जिलों के डीसी कार्यालयों की तरफ से यात्रियों की क्लीयरेंस के लिए हरियाणा गृह विभाग को जरूरी और अनिवार्य सिफारिशी चिट्ठी भेजी ही नहीं गई थी। जब तक इस बड़ी कागजी खामी का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और श्रद्धालुओं की बसें वाघा बॉर्डर की दहलीज पर खड़ी थीं। बुधवार को पूरा दिन गुरुद्वारा कमेटी के आला अधिकारी और पदाधिकारी चंडीगढ़ में गृह विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे ताकि कोई बीच का रास्ता निकल आए, लेकिन नियमों के फेर में फंसी अनुमति शाम तक जारी नहीं हो सकी। महीनों से इस पवित्र सफर का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि अगर कमेटी अपनी जिम्मेदारी सही से निभाती, तो आज वे पाकिस्तान के गुरुद्वारों में गुरु घर की हाजिरी लगा रहे होते। हालांकि, इस पूरे विवाद और अपनी ही किरकिरी पर गुरुद्वारा कमेटी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सफाई या बयान सामने नहीं आया है।

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