हरियाणा के रेहड़ी-पटरी वालों की बल्ले-बल्ले! अब 15 दिन में सुलझेंगे विवाद, रिटायर्ड जज करेंगे सुनवाई
Mar 30, 2026 3:18 PM
हरियाणा। अक्सर देखा जाता है कि शहर के सौंदर्यीकरण या अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर सबसे ज्यादा गाज रेहड़ी-पटरी वालों पर गिरती है। कभी लाइसेंस को लेकर विवाद, तो कभी जगह बदलने को लेकर अधिकारियों से खींचतान—इन छोटे व्यापारियों के पास अपनी बात रखने का कोई ठोस मंच नहीं था। लेकिन अब हरियाणा सरकार ने इस खाई को पाटने का इंतजाम कर लिया है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश के सभी जिलों में 'स्ट्रीट वेंडर्स विवाद निवारण समिति' का गठन किया जाए। यह कदम वेंडर्स को बिचौलियों और प्रशासनिक उत्पीड़न से बचाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
रिटायर्ड जज संभालेंगे कमान: निष्पक्षता की गारंटी
समिति की संरचना को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। कमेटी के अध्यक्ष पद पर किसी अनुभवी रिटायर्ड सिविल जज या न्यायिक दंडाधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। उनके साथ दो ऐसे सदस्य होंगे जो सामाजिक कार्यों या वेंडर्स के अधिकारों से जुड़े पेशेवर अनुभव रखते हों। सचिव अशोक मीणा के अनुसार, यह कमेटी न केवल शिकायतों को सुनेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर विवादित स्थल का भौतिक सत्यापन भी करेगी। इसके लिए समिति अपने सदस्यों या नगरपालिका अधिकारियों की मदद ले सकेगी।
शिकायत की प्रक्रिया: सादे कागज पर मिलेगा समाधान
प्रक्रिया को इतना सरल रखा गया है कि एक साधारण रेहड़ी वाला भी बिना किसी कानूनी पेचीदगी के अपनी बात कह सके। पीड़ित वेंडर को बस एक सादे कागज पर 'प्रपत्र-I' (Form-I) भरकर अपनी शिकायत देनी होगी। समिति सप्ताह में कम से कम एक बार या अध्यक्ष द्वारा तय समय पर बैठक करेगी। शिकायत मिलने के बाद दोनों पक्षों—यानी वेंडर और संबंधित विभाग—को आमने-सामने बिठाकर सुना जाएगा। 15 दिनों के भीतर अंतिम फैसला लेना होगा, ताकि गरीब वेंडर का काम-धंधा लंबे समय तक प्रभावित न हो।
अपील का भी विकल्प: अगर फैसले से नाखुश हों तो?
सरकार ने इस व्यवस्था को दो-स्तरीय बनाया है। यदि कोई पक्ष जिला स्तरीय समिति के फैसले से संतुष्ट नहीं होता, तो उसे 'सक्षम प्राधिकारी' के पास अपील करने का अधिकार होगा। इसके लिए भी 'फार्म-II' के माध्यम से सादे कागज पर आवेदन किया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था से न केवल रेहड़ी-पटरी वालों का गौरव बहाल होगा, बल्कि शहरों के वेंडिंग जोन और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने में भी मदद मिलेगी।