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हरियाणा-यूपी का सफर हुआ आसान: जुलाई में शुरू होगा 432 करोड़ का इंटरचेंज, जाम की छुट्टी

Apr 27, 2026 12:24 PM

हरियाणा। सोनीपत और कुंडली के रास्ते उत्तर प्रदेश की ओर रुख करने वाले मुसाफिरों के लिए अच्छी खबर है। कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (EPE) और यमुना एक्सप्रेस-वे के बीच की वह 'मिसिंग लिंक' अब जुड़ने जा रही है, जिसका इंतजार सालों से हो रहा था। करीब 432 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा इंटरचेंज अपने अंतिम पड़ाव पर है। नेशनल हाईवे-44 कॉरिडोर के साथ सफर करने वाले हरियाणा के वाहन चालकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा। ताजा अपडेट के अनुसार, जुलाई के अंत तक इस इंटरचेंज को पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक मैनेजमेंट एक नए स्तर पर पहुंच जाएगा।

परी चौक के 'महाजाम' से मिलेगा छुटकारा, सीधे यमुना एक्सप्रेस-वे पर होगी एंट्री

फिलहाल हरियाणा के सोनीपत, पानीपत या कुंडली से आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेस-वे पकड़ने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। ड्राइवरों को ईपीई (EPE) से उतरकर ग्रेटर नोएडा के बेहद व्यस्त 'परी चौक' से गुजरना पड़ता है, जो अक्सर जाम के कारण सिरदर्द बना रहता है। शहर के भीतर से होकर जीरो पॉइंट तक पहुंचने की इस प्रक्रिया में घंटों बर्बाद होते हैं। लेकिन नया इंटरचेंज शुरू होते ही वाहन बिना किसी रुकावट के सीधे एक एक्सप्रेस-वे से दूसरे पर स्विच कर सकेंगे। इससे न केवल ग्रेटर नोएडा शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि यात्रियों के करीब 20 किलोमीटर के चक्कर की भी बचत होगी।

समय और ईंधन की बचत: हरियाणा के इन जिलों को होगा सीधा फायदा

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा असर समय और लागत पर पड़ेगा। सोनीपत, जींद, करनाल और अंबाला की तरफ से आकर आगरा या लखनऊ जाने वाले वाहन चालकों का करीब आधे से एक घंटा बचेगा। इंटरचेंज के जरिए सफर सुगम होने से ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कनेक्टिविटी उत्तर भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी। भारी कमर्शियल वाहनों को अब रिहायशी इलाकों में जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे हादसों की आशंका भी घटेगी।

जुलाई में उद्घाटन की तैयारी: प्रोजेक्ट का काम अंतिम चरण में

एनएचएआई (NHAI) और संबंधित निर्माण एजेंसियां इस समय इंटरचेंज पर फिनिशिंग टच देने में जुटी हैं। सड़क की लेयरिंग और साइनबोर्ड लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। 432 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार यह ढांचा आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान भी काम की गति धीमी नहीं होने दी जाएगी ताकि जुलाई की डेडलाइन को हर हाल में पूरा किया जा सके। इस कनेक्टिविटी के शुरू होने से हरियाणा और यूपी के बीच व्यापारिक रिश्ते भी और अधिक मजबूत होंगे।

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