हरियाणा विधानसभा विशेष सत्र: कल 18 हजार ग्रुप-डी कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत, आएगा नया बिल
Apr 26, 2026 1:16 PM
हरियाणा। हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने चुनावी साल की आहट के बीच कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी पूरी कर ली है। सोमवार, 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसका केंद्र बिंदु प्रदेश के करीब 18 हजार 'ग्रुप-डी' कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित पदोन्नति है। कल सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की घंटी बजेगी, सरकार 'हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज बिल 2026' पटल पर रखेगी। इस बिल का पारित होना उन हजारों युवाओं के लिए भविष्य के नए द्वार खोलेगा जो लंबे समय से क्लर्क बनने का सपना संजोए बैठे हैं।
कोटे में 10 फीसदी की बढ़ोतरी, 5 साल की सर्विस अनिवार्य
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट ने पहले ही ग्रुप-डी कर्मचारियों के प्रमोशन कोटे को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने पर अपनी मुहर लगा दी है। इस फैसले के कानूनी रूप लेते ही विभाग में लिपिकीय पदों (Clerical Posts) पर भर्ती के दौरान अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि, इसके लिए एक शर्त भी रखी गई है—केवल वही कर्मचारी इस कोटे के तहत पदोन्नत हो सकेंगे, जिन्होंने अपनी सेवा के 5 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।
सदन में दिखेगी तल्खी: निंदा प्रस्ताव और कांग्रेस की रणनीति
सत्र भले ही एक दिन का हो, लेकिन इसमें सियासी तपिश भरपूर रहने वाली है। सत्ता पक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को घेरने के लिए सदन में एक निंदा प्रस्ताव लाएगा। इस सियासी हमले की काट तैयार करने के लिए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सोमवार सुबह 9:30 बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है। कांग्रेस इस सत्र के दौरान बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।
कर्मचारियों के लिए 'गोल्डन चांस'
प्रशासनिक गलियारों में इस बिल को गेम-चेंजर माना जा रहा है। ग्रुप-डी के वे कर्मचारी जो शैक्षणिक योग्यता रखते हैं लेकिन प्रमोशन के सीमित अवसरों के कारण एक ही पद पर अटके हुए थे, उनके लिए यह बिल संजीवनी की तरह है। सरकार का तर्क है कि इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विभागों में अनुभवी लिपिकों की कमी भी दूर होगी। अब नजरें कल होने वाली सदन की कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या यह बिल बिना किसी बाधा के पास हो पाता है या विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ता है।