मोरनी हिल्स सर्वे मामला: हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पर लगाया जुर्माना, दावों को बताया संदिग्ध
Apr 26, 2026 11:37 AM
पंचकूला। पंचकूला के पहाड़ी पर्यटन स्थल मोरनी हिल्स में जमीन के सीमांकन और सर्वे को लेकर हरियाणा सरकार की कार्यप्रणाली अब न्यायिक जांच के घेरे में है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार को उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब अदालत ने न केवल उसके दावों पर संदेह जताया, बल्कि ढुलमुल रवैये के लिए 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया। दरअसल, सरकार ने दावा किया था कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सर्वे का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन याचिकाकर्ता ने इन दावों की हवा निकाल दी।
कागजों में पूरा हुआ काम, जमीन पर सन्नाटा?
हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने शपथ पत्र देकर बताया कि 16 अप्रैल से पहले ही सीमांकन का कार्य शुरू कर दिया गया था और अब तक करीब 45 एकड़ क्षेत्र में सर्वे पूरा भी हो चुका है। सरकार का कहना है कि टेंडर एक निजी कंपनी को अलॉट कर दिया गया है और उसे 10 दिनों के भीतर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस दिन कोर्ट में बहस होनी थी, उसी दिन आनन-फानन में दस्तावेज फाइल किए गए, जिसे अदालत ने प्रक्रिया का मजाक माना।
'अनुभवहीन पटवारी और खाली खजाना'
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सजल बंसल ने सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि जमीनी हकीकत सरकारी फाइलों से कोसों दूर है। बंसल के मुताबिक, प्रशासन ने जिन 20 पटवारियों की ड्यूटी लगाई है, उनके पास इस जटिल भौगोलिक क्षेत्र के सर्वे का अनुभव ही नहीं है। इतना ही नहीं, नायब तहसीलदार के पद खाली होने और बजट की स्वीकृतियां न मिलने के कारण कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि सरकार केवल कोर्ट की कार्रवाई से बचने के लिए कागजी घोड़े दौड़ा रही है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख और जांच के आदेश
अदालत ने सरकार के आवेदन और याचिकाकर्ता के दावों के बीच दिख रहे इस बड़े 'गैप' को गंभीरता से लिया है। जस्टिस ने निर्देश दिए हैं कि अगले दो हफ्तों के भीतर संबंधित फील्ड सर्वे ऑफिसर (FSO) से निर्देश लेकर यह स्पष्ट किया जाए कि क्या वाकई 45 एकड़ जमीन पर काम पूरा हुआ है या नहीं। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर दावों में सच्चाई नहीं पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अब सबकी नजरें दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।