हरियाणा में 6 जून तक आंधी और बारिश का अलर्ट, दो पश्चिमी विक्षोभ मचाएंगे हलचल
Jun 02, 2026 9:44 AM
Haryana Weather: चंडीगढ़ और आसपास के मैदानी इलाकों में सूरज के तल्ख तेवरों के बीच राहत की खबर आई है। हरियाणा में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। हिसार स्थित चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के लिए नया बुलेटिन जारी किया है। इस पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश में 6 जून तक मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इस दौरान सूबे के कई हिस्सों में धूल भरी आंधियां चलने, आसमान में बादलों की आवाजाही रहने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है।
बैक-टू-बैक एक्टिव हो रहे दो पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिकों के हाथ लगे ताजा सैटेलाइट आंकड़ों से पता चला है कि इस समय उत्तर-पश्चिम भारत पर दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ लगातार दस्तक दे रहे हैं। इनमें से पहला सिस्टम 2 जून की रात से ही सक्रिय हो चुका है, जबकि दूसरा सिस्टम 4 जून को पहाड़ी राज्यों की तरफ आगे बढ़ेगा। इसके अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब के वायुमंडल में एक मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र) भी विकसित हो रहा है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण हरियाणा के मैदानी जिलों में मौसम का रुख अचानक पलटने जा रहा है।
तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश के आसार
मौसम विभाग की मानें तो 2 जून की देर रात से शुरू होने वाला यह बदलाव 6 जून तक रुक-रुक कर अपना असर दिखाएगा। इस समय अवधि में राज्य के अधिकांश हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कई जिलों में आकाशीय बिजली चमकने के साथ ही हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की पूरी उम्मीद है। कुछ संवेदनशील इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बौछारें भी गिर सकती हैं, जिससे उमस और तपती गर्मी से जूझ रहे आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की गाइडलाइन
मौसम का यह बदला हुआ मिजाज इस समय खेतों में काम कर रहे किसानों के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में रबी फसलों की कटाई के बाद के काम चल रहे हैं या खरीफ सीजन के लिए खेतों को तैयार किया जा रहा है, वहां विशेष सतर्कता बरतनी होगी। कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की पल-पल की रिपोर्ट देखकर ही अपने कृषि कार्यों की रूपरेखा तय करें। खुले में पड़े अनाज और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पारे में आएगी गिरावट, विभाग रखेगा पैनी नजर
राहत की बात यह भी है कि इस मौसमी उठापटक के चलते सूबे के अधिकतम तापमान में फिलहाल किसी बड़ी बढ़ोतरी की आशंका नहीं है। बादलों के डेरे और बीच-बीच में होने वाली बूंदाबांदी से दिन के पारे में गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे लू के थपेड़ों से लोगों का बचाव होगा। डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार, विभाग की टीमें उत्तर-पश्चिम भारत में बन रही इन मौसमी गतिविधियों पर लगातार सैटेलाइट के जरिए नजर रख रही हैं। अगर हवा के दबाव या बादलों की दिशा में कोई अप्रत्याशित बदलाव आता है, तो तुरंत प्रभाव से ताजा एडवाइजरी जारी की जाएगी।