हरियाणा में गर्मी पर लगेगी लगाम: कल से करवट लेगा मौसम, बारिश के आसार
Mar 13, 2026 11:25 AM
हरियाणा। मार्च की शुरुआत में ही मई जैसी तपिश झेल रहे हरियाणा वासियों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले कुछ दिनों से सूरज के तल्ख तेवरों ने न केवल लोगों के पसीने छुड़ा दिए थे, बल्कि दोपहर के वक्त सड़कों पर सन्नाटा भी पसरा नजर आने लगा था। पलवल और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में तो पारा 36 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। हालांकि, अब मौसम विभाग के ताजा अनुमान ने तपती दोपहरों से ब्रेक मिलने के संकेत दिए हैं। शनिवार यानी 14 मार्च से प्रदेश के मौसम तंत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिससे लू जैसे हालात से जूझ रहे लोगों को सुकून मिलेगा।
पश्चिमी विक्षोभ होगा सक्रिय: इन जिलों में दिखेगा असर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों से होते हुए मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। इसका असर शनिवार दोपहर के बाद से ही दिखने लगेगा। 14 मार्च को विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा के जिले जैसे हिसार, भिवानी, चरखी दादरी और फतेहाबाद में बादल अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। 15 मार्च को यह मौसमी सिस्टम और मजबूत होगा, जिसका असर अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल जैसे उत्तरी व पूर्वी जिलों में भी देखने को मिलेगा।
तापमान का गणित: दिन में राहत, रात में बढ़ेगी उमस
फिलहाल हरियाणा के अधिकतम तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखी जा रही है। गुरुग्राम में पारा 34.3 डिग्री और नूंह में 35.2 डिग्री तक जा पहुंचा है, जिसने लोगों को समय से पहले एसी और कूलर चलाने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले 72 घंटों में होने वाली बारिश के कारण दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, बादलों की आवाजाही और हवा में नमी बढ़ने की वजह से न्यूनतम यानी रात के तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी महसूस की जा सकती है। कुल मिलाकर, अगले दो-तीन दिन मौसम का मिजाज मिला-जुला रहेगा।
अन्नदाताओं के लिए चेतावनी: फसल सुरक्षा को लेकर रहें मुस्तैद
मौसम में आ रहे इस बदलाव ने किसानों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। मार्च का अंत और अप्रैल का पहला सप्ताह रबी फसलों की कटाई और मड़ाई का मुख्य समय होता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल की कटाई हो चुकी है, तो उसे खुले आसमान के नीचे न छोड़ें। अनाज को सुरक्षित गोदामों या तिरपाल से ढककर रखें। आने वाले पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता को देखते हुए ही कटाई का अगला चरण तय करें। कुरुक्षेत्र और करनाल जैसे बेल्ट में, जहां गेहूं की फसल पकने को तैयार है, वहां तेज हवाओं के साथ बारिश नुकसान का कारण भी बन सकती है।