बारिश की मार झेलने वाले अन्नदाता को केंद्र का तोहफा, गेहूं खरीद के कड़े नियमों में बदलाव
Apr 16, 2026 10:19 AM
हरियाणा। हरियाणा की मंडियों में अपनी खून-पसीने की कमाई लेकर पहुंचे किसानों के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और मंडियों में पड़ी जिस फसल की चमक छीन ली थी, अब उसे सरकारी एजेंसियां रिजेक्ट नहीं कर पाएंगी। हरियाणा सरकार की पैरवी के बाद केंद्र ने गेहूं खरीद के तय मानकों (Specifications) में ढील देने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
बारिश की मार से फीकी पड़ी चमक अब बाधा नहीं
आमतौर पर सरकारी खरीद के समय गेहूं के दानों की चमक और उनकी बनावट को बेहद सख्ती से परखा जाता है, लेकिन इस बार कुदरत की मार को देखते हुए नियमों को लचीला बनाया गया है। नए आदेशों के मुताबिक, अब वह गेहूं भी खरीदा जा सकेगा जो 70 फीसदी तक अपनी चमक खो चुका है। इसके अलावा, दाना छोटा होने या टूटने की स्थिति में भी घबराने की जरूरत नहीं है। पहले जहां केवल 6 प्रतिशत तक सिकुड़े और टूटे हुए दानों की अनुमति थी, उसे अब बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
अलग से लगेगी ढेरी, जल्द होगा स्टॉक का उठान
सरकार ने नियमों में रियायत तो दी है, लेकिन खरीद एजेंसियों के सामने एक शर्त भी रखी है। इस छूट के दायरे में आने वाले गेहूं को सामान्य स्टॉक के साथ नहीं मिलाया जाएगा। मंडियों में इसकी अलग ढेरी लगानी होगी और इसका रिकॉर्ड भी अलग से संधारित किया जाएगा। साथ ही, भंडारण के दौरान इस तरह के गेहूं को सबसे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) या अन्य योजनाओं के जरिए निपटाने को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि लंबे समय तक रखे रहने से इसकी गुणवत्ता और न गिरे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
हरियाणा के नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की व्यथा को देखते हुए केंद्र को पत्र लिखा था। उन्होंने बताया, "हमारे अनुरोध पर भारतीय खाद्य निगम (FCI) की टीमों ने हरियाणा की मंडियों का दौरा कर नुकसान का जमीनी आकलन किया था। उसी रिपोर्ट के आधार पर यह बड़ी राहत मिली है। अब लस्टर लॉस (चमक की कमी) की वजह से खरीद नहीं रुकेगी और मंडियों में उठान के काम में तेजी आएगी।"