HPSC भर्ती विवाद: लेक्चरर के 67 पदों पर सिर्फ 4 पास, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में रिजल्ट रहा 'जीरो'
Mar 25, 2026 10:44 AM
हरियाणा। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। प्रदेश के बहुतकनीकी (पॉलीटेक्निक) संस्थानों में लेक्चरर बनने का सपना देखने वाले हजारों युवाओं को तगड़ा झटका लगा है। हाल ही में जारी हुए तीन अलग-अलग श्रेणियों के रिजल्ट ने न केवल अभ्यर्थियों को मायूस किया है, बल्कि आयोग की परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि 67 खाली पदों को भरने के लिए आयोजित की गई इस प्रक्रिया में सफलता का आंकड़ा इकाई की संख्या (सिर्फ 4) को भी पार नहीं कर सका।
ऑटोमोबाइल और इंस्ट्रूमेंटेशन में 'सन्नाटा', नहीं मिला एक भी योग्य उम्मीदवार
हैरानी की बात यह है कि लेक्चरर इन ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के 15 पदों और इंस्ट्रूमेंटेशन एंड कंट्रोल इंजीनियरिंग के 20 पदों के लिए एक भी उम्मीदवार सफल नहीं हुआ। यानी इन 35 पदों पर भर्ती का खाता तक नहीं खुल सका और सभी अभ्यर्थी असफल घोषित कर दिए गए। वहीं, मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नोलॉजी के 32 पदों के लिए हुई परीक्षा में महज 4 युवाओं ने ही बाजी मारी। इस परिणाम के बाद तकनीकी शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है।
35% का 'डेथ वॉरंट': युवाओं में भारी रोष
भर्ती परीक्षा में इस सामूहिक विफलता के पीछे 'सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट' की उस शर्त को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसमें न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक लेना अनिवार्य है। परीक्षार्थियों का तर्क है कि पेपर का स्तर और मूल्यांकन का तरीका इतना जटिल है कि योग्य उम्मीदवार भी इस जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। युवाओं का कहना है कि यह क्राइटेरिया उनके करियर के लिए किसी 'डेथ वॉरंट' से कम नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक अब यह चर्चा तेज है कि क्या जानबूझकर पेपर को इतना कठिन बनाया गया या फिर मूल्यांकन प्रक्रिया में ही कोई खोट है।
2024 से चल रही थी तैयारी, अब खाली रहेंगे पद
बता दें कि इन पदों के लिए विज्ञापन साल 2024 में जारी किया गया था। लंबे इंतजार के बाद जब परीक्षा हुई, तो युवाओं को उम्मीद थी कि बेरोजगारी का कलंक धुलेगा। लेकिन अब जब रिजल्ट सामने है, तो अधिकांश पद खाली रहने तय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग ने अपने परीक्षा पैटर्न और पासिंग क्राइटेरिया पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में तकनीकी विभागों में विशेषज्ञों की भारी कमी हो सकती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस 'जीरो रिजल्ट' के बाद युवाओं की मांग पर क्या रुख अपनाती है।