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IDFC Bank Scam: 645 करोड़ के बैंक घोटाले में हरियाणा पंचायत विभाग का तत्कालीन अधीक्षक गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई

Jun 12, 2026 11:50 AM

हरियाणा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा और चंडीगढ़ को हिलाकर रख देने वाले 645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। वित्तीय हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ने हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार को 10 जून को गिरफ्तार कर लिया। नरेश कुमार पर सरकारी पद पर रहते हुए इस महाघोटाले के मास्टरमाइंड्स के साथ साठगांठ करने और अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने का संगीन आरोप है।

सरकारी खजाने और स्कूलों के पैसों पर डाला डाका

ईडी की जांच में जो परतें खुली हैं, वे चौंकाने वाली हैं। जांच के मुताबिक, हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के आधिकारिक खातों के साथ-साथ पंचकूला और चंडीगढ़ के दो नामी प्राइवेट स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों को निशाना बनाया गया था।

इन खातों में जमा करीब 645 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सरकारी और सार्वजनिक राशि को अवैध तरीके से निकाल लिया गया। इस पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार विक्रम वाधवा है, जिसने रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ भ्रष्ट बैंक अफसरों और सरकारी मुलाजिमों के साथ मिलकर सरकारी धन को साफ करने की यह पूरी साजिश रची थी।

फर्जी कंपनी के जरिए हुआ पैसों का लेन-देन, ऐसे छिपाया गुनाह

जांच एजेंसी के हाथ लगे दस्तावेजी सबूत बताते हैं कि इस घोटाले की रकम का एक बड़ा हिस्सा सीधे नरेश कुमार तक पहुंचा था। इसके लिए बाकायदा 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स' नाम की एक शेल (फर्जी) कंपनी का इस्तेमाल किया गया।

ईडी के आला अधिकारियों का कहना है कि नरेश कुमार की भूमिका सिर्फ फंड हासिल करने तक सीमित नहीं थी; बल्कि वह काले धन को सफेद करने के लिए की जाने वाली 'लेयरिंग' (पैसों को कई खातों में घुमाना) और अपराध की इस कमाई को कानूनी शिकंजे से छिपाने की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जुटा हुआ था। फिलहाल ईडी आरोपी से पूछताछ कर इस रैकेट से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है।

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