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SSC का बड़ा फैसला: अब गलत सवाल होने पर सभी अभ्यर्थियों को मिलेंगे पूरे नंबर, जानें नई गाइडलाइन

Apr 11, 2026 3:51 PM

हरियाणा। पिछले कुछ वर्षों में एसएससी की विभिन्न परीक्षाओं की आंसर-की को लेकर विवादों का सिलसिला थमा नहीं था। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उत्तरों में विसंगतियों को लेकर आरटीआई (RTI), जन शिकायत पोर्टल और अदालतों के चक्कर काट रहे थे। इन तमाम शिकायतों और कोर्ट की सख्त टिप्पणियों को संज्ञान में लेते हुए आयोग ने अपनी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की है। नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य विवादों को न्यूनतम करना और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है।

अंक वितरण का गणित: किसे और कैसे होगा फायदा?

आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंकों का वितरण अब अधिक न्यायसंगत होगा। इसे कुछ प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है:

निरस्त प्रश्न: यदि कोई प्रश्न सिलेबस से बाहर का है, तकनीकी रूप से गलत है या उसमें कोई भी सही विकल्प मौजूद नहीं है, तो उस प्रश्न को निरस्त माना जाएगा। इसके अंक सभी उम्मीदवारों को दिए जाएंगे, चाहे उन्होंने वह प्रश्न हल करने की कोशिश की हो या नहीं।

बहु-विकल्प (Multiple Correct Options): यदि किसी प्रश्न के दो विकल्प सही पाए जाते हैं, तो उन सभी छात्रों को पूरे अंक मिलेंगे जिन्होंने उन दोनों में से किसी भी एक सही विकल्प को चुना होगा।

अनुवाद की त्रुटि: अक्सर देखा गया है कि अंग्रेजी से हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के दौरान प्रश्न का अर्थ बदल जाता है। अब ऐसी स्थिति में केवल उस विशेष भाषा माध्यम के छात्रों के लिए प्रश्न का मूल्यांकन अलग से किया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण आपत्तियों पर रहेगा जोर

नई प्रणाली में आयोग ने एक दिलचस्प बदलाव किया है। अब किसी प्रश्न पर मिलने वाली आपत्तियों की संख्या मायने नहीं रखेगी। अगर किसी एक छात्र ने भी तथ्यात्मक रूप से मजबूत आपत्ति दर्ज कराई है, तो उसे स्वीकार किया जाएगा। वहीं, हजारों की संख्या में आने वाली निराधार या कमजोर आपत्तियों को सीधे खारिज कर दिया जाएगा। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि अति-सूक्ष्म या तकनीकी आधार पर प्रश्न निरस्त कराने की 'चतुराई' नहीं चलेगी, बशर्ते प्रश्न का मूल भाव एक सामान्य छात्र की समझ में आ रहा हो।

विशेषज्ञों की टीम करेगी आखिरी फैसला

अभ्यर्थियों द्वारा दर्ज कराई गई हर आपत्ति को संबंधित विषय के विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) के पास भेजा जाएगा। उनकी सिफारिशों के आधार पर ही 'फाइनल आंसर की' तैयार होगी। इस नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली देरी और अदालती मुकदमों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे लाखों युवाओं का करियर समय पर परवान चढ़ सकेगा।

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