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हरियाणा का छोर बना दुनिया का नंबर-1 पहलवान: दादरी के सुजीत कलकल ने कुश्ती में गाड़ा झंडा

Apr 27, 2026 3:57 PM

हरियाणा। हरियाणा की माटी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कुश्ती के हुनर में उसका कोई सानी नहीं है। चरखी दादरी जिले के गांव इमलोटा के रहने वाले युवा पहलवान सुजीत कलकल ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसका सपना हर एथलीट देखता है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग द्वारा जारी ताजा वैश्विक रैंकिंग में सुजीत ने 65 किलोग्राम भारवर्ग में दुनिया के नंबर-1 पहलवान होने का गौरव हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ ही सुजीत अब बजरंग पुनिया और योगेश्वर दत्त जैसे दिग्गज पहलवानों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने कभी कुश्ती की वैश्विक रैंकिंग में भारत का परचम लहराया था।

पदक दर पदक तय किया नंबर-1 का सफर

सुजीत की यह कामयाबी रातों-रात नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे मैट पर बहाया गया पसीना और निरंतरता है। पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सुजीत ने अपराजेय प्रदर्शन किया है। खासकर अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने और विश्व स्तर के नामी पहलवानों को पटखनी देने के बाद उनकी रैंकिंग में जबरदस्त सुधार देखा गया। उनकी तकनीक और फुर्ती के कायल अब विदेशी कोच भी होने लगे हैं। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग में मिली यह टॉप रैंकिंग उनके इसी शानदार ट्रैक रिकॉर्ड का नतीजा है।

पिता का गर्व और कोच की 'ओलंपिक' भविष्यवाणी

बेटे की इस स्वर्णिम उपलब्धि पर इमलोटा गांव में दिवाली जैसा माहौल है। सुजीत के पिता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश और प्रदेश की जीत है। वहीं, उनके कोच का मानना है कि सुजीत जिस लय में हैं, वह आगामी ओलंपिक खेलों के लिए भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरेंगे। कोच के मुताबिक, सुजीत का डिफेंस और काउंटर-अटैक करने का तरीका उन्हें अन्य पहलवानों से जुदा बनाता है। अगर उनका यह प्रदर्शन जारी रहा, तो ओलंपिक के पोडियम पर तिरंगा लहराना तय है।

खेल जगत में खुशी की लहर

सुजीत कलकल के विश्व नंबर-1 बनने की खबर मिलते ही सोशल मीडिया से लेकर खेल के गलियारों तक बधाइयों का तांता लग गया है। दादरी और आसपास के जिलों के युवा खिलाड़ियों के लिए सुजीत अब एक नई प्रेरणा बन गए हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि 65 किलोग्राम भारवर्ग हमेशा से काफी प्रतिस्पर्धी रहा है, ऐसे में दुनिया के दिग्गज पहलवानों को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर काबिज होना भारतीय कुश्ती के लिए एक शुभ संकेत है।

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