Search

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: हरियाणा के कच्चे कर्मचारी होंगे पक्के, SC ने लगाई हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर

Apr 17, 2026 11:13 AM

हरियाणा। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक की कानूनी लड़ाई में आखिरकार हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों की जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि जो कर्मचारी दशकों से सरकारी तंत्र का पहिया घुमा रहे हैं, उन्हें अनिश्चितकाल तक अनुबंध की बेड़ियों में नहीं जकड़ा जा सकता। जस्टिस की बेंच ने हरियाणा सरकार की उन दलीलों को किनारे कर दिया जो नियमितीकरण की राह में रोड़ा बनी हुई थीं। कोर्ट ने दो टूक कहा कि अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है और भर्ती के समय वह तमाम योग्यताएं पूरी करता था, तो उसे पक्का करना सरकार की जिम्मेदारी है।

'पद खाली नहीं' का बहाना अब नहीं चलेगा

अक्सर सरकारें फंड या खाली पदों की कमी का हवाला देकर पक्का करने से कतराती रही हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि विभाग में नियमित पद खाली नहीं हैं, तो सरकार विशेष तौर पर 'अधिसंख्य पद' (सुपरन्यूमरेरी पोस्ट) सृजित करे। इसका सीधा मतलब यह है कि योग्य कर्मचारी अब सिस्टम की खामियों के कारण सड़क पर नहीं आएंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने 'समान काम-समान वेतन' के नियम को और मजबूती दी है। जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इन कर्मचारियों को उनके समकक्ष पक्के कर्मचारियों के बराबर न्यूनतम वेतनमान देना ही होगा।

2014 की नीतियों पर स्थिति साफ: कहीं खुशी, कहीं गम

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तकनीकी रूप से बेहद सटीक है। कोर्ट ने 16 जून और 18 जून 2014 को बनी नियमितीकरण नीतियों को पूरी तरह सही माना है, जिसका मतलब है कि इन नीतियों के तहत पक्के हुए कर्मचारियों की नौकरी पर अब कोई आंच नहीं आएगी। हालांकि, 7 जुलाई 2014 की नीति के तहत आने वाले कर्मचारियों को झटका लगा है। कोर्ट ने इस नीति को संवैधानिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आधार पर रद्द कर दिया है। सरकार को अब एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार कर उन्हें रेगुलर करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना होगा।

गेस्ट टीचर्स और अनुबंध कर्मियों को मिली नई जिंदगी

इस फैसले का सबसे बड़ा असर शिक्षा विभाग में कार्यरत गेस्ट टीचर्स और विभिन्न बोर्ड-निगमों के अनुबंध कर्मचारियों पर पड़ेगा। लंबे समय से नौकरी जाने की तलवार लटकाए घूम रहे इन कर्मियों के लिए यह आदेश किसी संजीवनी से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न केवल कर्मचारियों का शोषण रुकेगा, बल्कि सरकारी सेवाओं में स्थायित्व भी आएगा। अब सबकी नजरें हरियाणा सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्दी कोर्ट के इन निर्देशों को धरातल पर उतारती है।

You may also like:

Please Login to comment in the post!