Vijeta Dahiya CJP: कौन हैं विजेता दहिया? विदेश मंत्रालय की नौकरी छोड़ जो बने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुख्य प्रवक्ता
Jun 07, 2026 11:21 AM
हरियाणा। हरियाणा की माटी से निकले युवा जब लीक से हटकर चलते हैं, तो अपनी एक अलग ही इबारत लिखते हैं। सोनीपत के एक मध्यमवर्गीय शिक्षक परिवार में जन्मे विजेता दहिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उन्होंने रैनबैक्सी में कदम रखा। मगर, मन में क्रिएटिविटी का कीड़ा ऐसा कुलबुलाया कि वे किस्मत आजमाने सीधे मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पहुंच गए। मुंबई की आपाधापी के बीच उन्होंने वास्तविकता को समझा और साल 2012 में कड़े संघर्ष के बाद स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC CGL) की परीक्षा क्रैक कर विदेश मंत्रालय में सरकारी अफसर की कुर्सी संभाली।
'भाड़ में जाए नौकरी' और ध्रुव राठी के साथ का वो दौर
विदेश मंत्रालय में करीब 3 साल 2 महीने सेवा देने के बाद विजेता ने उस सुरक्षित सरकारी नौकरी को अलविदा कह दिया, जिसके लिए लाखों युवा सालों-साल तैयारी करते हैं। इसी अनुभव और आत्ममंथन पर उन्होंने बाद में 'टू हेल विद दैट जॉब' (भाड़ में जाए नौकरी) नामक एक किताब भी लिखी। इसके बाद वे पूरी तरह से मीडिया, रिसर्च और लेखन के क्षेत्र में कूद पड़े। इस दौरान डिजिटल मीडिया के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, यूट्यूबर ध्रुव राठी के साथ उनका जुड़ाव हुआ। विजेता ने करीब 5 साल तक ध्रुव राठी के मुख्य रिसर्चर और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में परदे के पीछे रहकर कंटेंट की पूरी कमान संभाली, जिसने उन्हें राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण की एक नई समझ दी।
गैंगस्टर फिल्मों को 'ना', हरियाणवी वेब सीरीज को मिला अवॉर्ड
विजेता दहिया का झुकाव हमेशा से साफ-सुथरे सिनेमा की तरफ रहा। उन्होंने बताया कि मुंबई और डिजिटल स्पेस में काम करने के दौरान उन्हें गैंगस्टर और अपराध पर आधारित कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन समाज पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक असर को देखते हुए उन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली। उन्होंने अपनी क्षेत्रीय भाषा को प्राथमिकता दी और 'दरारें' तथा 'ओपरी-पराई' जैसी सुपरहिट हरियाणवी फिल्मों और वेब सीरीज का लेखन किया। स्टेज (STAGE) ऐप पर धूम मचाने वाली उनकी सीरीज 'ओपरी-पराई' को तो फरीदाबाद में आयोजित एक प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल में 'बेस्ट वेब सीरीज' के अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
'जाति व्यवस्था' पर नई किताब और कॉकरोच मूवमेंट का सच
लेखन की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके विजेता अब अपनी तीसरी किताब 'जाति एक ब्राह्मणवादी कल्पना है' पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि भारतीय समाज में जातिगत पहचान से ऊपर उठकर व्यक्तिगत पहचान को समझना जरूरी है। वहीं, इन दिनों देश के सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल मचाने वाले 'कॉकरोच मूवमेंट' से जुड़ने के सवाल पर विजेता ने बड़ा दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे इस मूवमेंट के संस्थापक अभिजीत दीपके को पहले से नहीं जानते थे। दरअसल, ध्रुव राठी ने उनसे कहा था कि इस अभियान की बात को तार्किक और सही तरीके से जनता के सामने रखने के लिए एक मजबूत वक्ता की जरूरत है। विजेता को मूवमेंट का मकसद सही लगा और वे बिना कोई पैसा लिए, विशुद्ध रूप से एक सामाजिक अभियान के तौर पर इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रवक्ता बन गए।