Hansi Water Dispute: चैनत गांव में 10 दिन से भूखे हैं 5 बुजुर्ग, हांसी DC बोले- कुछ हुआ तो किसान नेताओं पर चलेगा मर्डर का केस
Jun 20, 2026 11:10 AM
हिसार। हरियाणा के हिसार जिले के हांसी उपमंडल के चैनत गांव में पानी की एक-एक बूंद के हक को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार और प्रशासन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। पिछले 35 दिनों से गांव में चल रहा धरना अब पूरी तरह से प्रशासनिक और राजनीतिक रस्साकशी में तब्दील हो चुका है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे पांच बुजुर्ग ग्रामीण पिछले 10 दिनों से अन्न-जल त्यागकर मौत से खेल रहे हैं। प्रशासन इन्हें जबरन धरने से उठाना चाहता है, लेकिन आंदोलनकारियों के तेवर इस कदर तल्ख हैं कि उन्होंने अपनी जान पर बनने की सूरत में सीधे जिले के आला अधिकारियों और सत्ताधारी दल के विधायक को कानूनी कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर ली है। अनशन पर बैठे टेकराम, बलवान, राजकुमार, जय नारायण और दिलबाग ने बकायदा नोटरी से एफिडेविट तस्दीक करवाए हैं कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसके सीधे जिम्मेदार हांसी के उपायुक्त राहुल नरवाल, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार और भाजपा विधायक विनोद भयाना होंगे।
प्रशासन का तीखा पलटवार: संघर्ष समिति पर दर्ज होगा मर्डर का केस
ग्रामीणों के इस एफिडेविट वाले दांव पर प्रशासनिक अमला भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। हांसी के डीसी राहुल नरवाल ने दो टूक लहजे में साफ कर दिया है कि अगर भूख हड़ताल पर बैठे बुजुर्गों की सेहत को कोई भी नुकसान पहुंचता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर आंदोलन की कमान संभाल रही संघर्ष समिति ही कसूरवार होगी। प्रशासन ऐसी स्थिति में समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ हत्या (मर्डर) का मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगा। दोनों पक्षों की इस जिद ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि खट्टर और सैनी सरकार के दौर में किसान आंदोलनों की तपिश झेल चुकी हरियाणा पुलिस किसी भी बड़े बवाल से बचना चाहती है।
आखिर क्या है 80 करोड़ की इस पाइपलाइन का पूरा फसाद?
इस पूरे विवाद की जड़ में केंद्र सरकार की 'अमृत योजना' के तहत बिछाई जा रही पेयजल पाइपलाइन है। बरवाला के राजली हेड से करीब 80 करोड़ रुपए की लागत से 30 किलोमीटर लंबी एक बड़ी पाइपलाइन हांसी शहर के लिए ले जाई जा रही है ताकि वहां के शहरी इलाके में पीने के पानी की किल्लत को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। यह पाइपलाइन अब राजली से होते हुए चैनत गांव की सीमा तक पहुंच चुकी है। चैनत के ग्रामीणों का सीधा और तार्किक तर्क यह है कि जब उनके गांव की छाती चीरकर पानी की इतनी बड़ी लाइन गुजर रही है, तो उन्हें प्यासा क्यों रखा जा रहा है? ग्रामीणों की मांग है कि इस मुख्य पाइपलाइन से उनके गांव को भी पेयजल का कनेक्शन दिया जाए। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का तकनीकी अड़ंगा यह है कि यह योजना सिर्फ शहरी आबादी के लिए डिजाइन की गई है और इसमें से बीच रास्ते में ग्रामीण इलाकों को पानी देना मुमकिन नहीं है।
विधायक की फजीहत, सड़क जाम और 250 ट्रैक्टरों का हुंकार
35 दिनों के इस आंदोलन की कहानी बेहद नाटकीय रही है। शुरुआत में जब इलाके के भाजपा विधायक विनोद भयाना ग्रामीणों को समझाने पहुंचे, तो मंच पर ही लोगों ने उनके पुराने 12 वादे याद दिलाकर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई, जिसके बाद विधायक को बैकफुट पर आना पड़ा। बात तब ज्यादा बिगड़ गई जब 1 जून को उग्र ग्रामीणों ने हथौड़े और रॉड लेकर पाइपलाइन को उखाड़ने की कोशिश की और हांसी-बरवाला मार्ग पर बड़े-बड़े पाइप डालकर चक्का जाम कर दिया। इसके जवाब में पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए 31 किसान नेताओं पर सरकारी काम में बाधा डालने की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। इस पुलिसिया कार्रवाई की आग में घी डालने का काम 18 जून को हुआ, जब किसानों ने पुलिस को चुनौती देते हुए हांसी शहर में 250 ट्रैक्टरों के साथ विशाल मार्च निकाला, जिससे पूरा शहर घंटों जाम रहा।
चार दौर की वार्ताएं बेनतीजा, जिद पर अड़े दोनों पक्ष
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए चंडीगढ़ से लेकर जिला मुख्यालय तक अब तक चार दौर की हाई-प्रोफाइल बैठकें हो चुकी हैं। संघर्ष समिति के प्रतिनिधि सूबे के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा से भी टेबल टॉक कर चुके हैं। सरकार ने ग्रामीणों के सामने बीच का रास्ता निकालते हुए प्रस्ताव रखा था कि वे राजली हेड से चैनत गांव के लिए एक अलग छोटी पाइपलाइन बिछाकर पानी देने को तैयार हैं। लेकिन आंदोलनकारी इस सरकारी लॉलीपॉप को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकारें बदल जाती हैं और अलग पाइपलाइन के वादे कागजों में दफन हो जाते हैं; इसलिए जब तक मुख्य पाइपलाइन से उनके गांव का वाल्व नहीं जोड़ा जाता, तब तक यह आमरण अनशन और आंदोलन खत्म नहीं होगा।