फेसबुक पर 'लंदन की हसीना' से दोस्ती पड़ी महंगी, हिसार के किसान से ₹7.19 लाख की क्रिप्टो ठगी
May 17, 2026 2:52 PM
हिसार। डिजिटल होते दौर में साइबर अपराधी अब सीधे और भोले-भाले लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। हिसार के गांव सातरोड खुर्द के रहने वाले 46 वर्षीय किसान राजेश सिहाग, जो खुद पोस्ट ग्रेजुएट (MA) हैं, इस नए जमाने की ठगी के शिकार हो गए। बीती 22 मार्च 2026 को राजेश के फेसबुक अकाउंट पर पूजा बंसल नाम की एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। राजेश ने इसे एक सामान्य सी बात समझकर स्वीकार कर लिया, लेकिन उन्हें इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होने वाली है।
खुद को बताया लंदन की कारोबारी, 'बॉस' के नाम पर बुना जाल
फेसबुक पर चैटिंग का सिलसिला बढ़ा तो शातिर महिला ने राजेश का व्हाट्सएप नंबर हासिल कर लिया। उसने खुद को लंदन की एक नामचीन इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबारी के तौर पर पेश किया, जिसका व्यापार बेंगलुरु तक फैला हुआ था। बातों ही बातों में उसने राजेश को अपनी अमीर जीवनशैली और क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग से होने वाली बंपर कमाई का चस्का लगा दिया।
जब राजेश निवेश के लिए मानसिक रूप से तैयार हो गए, तो महिला ने इस खेल में अपने कथित बॉस 'अंकित वर्मा' की एंट्री कराई। उसने अंकित का व्हाट्सएप नंबर देते हुए कहा कि यही वो शख्स है जो ट्रेडिंग के अचूक टिप्स देता है, बशर्ते मुनाफे का 30 फीसदी हिस्सा कमीशन के रूप में उसे देना होगा। इसके साथ ही पीड़ित के सामने एक तकनीकी शर्त भी रखी गई कि उसे अपने यूएसडीटी (USDT) स्लॉट को कम से कम पांच दिनों के लिए होल्ड पर रखना होगा।
पांच बैंक खातों में ट्रांसफर कराई रकम, फिर 'नो नेटवर्क' का बहाना
झांसे में आए किसान ने तगड़े मुनाफे की उम्मीद में अपनी गाढ़ी कमाई की रकम महिला के बताए अनुसार पांच अलग-अलग बैंक खातों में टुकड़ों-टुकड़ों में डालनी शुरू कर दी। देखते ही देखते राजेश के खाते से ₹7.19 लाख रुपये ठगों के पास पहुंच गए। रकम हाथ में आते ही आरोपियों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। जब राजेश ने अपने मुनाफे और मूल रकम की वापसी को लेकर व्हाट्सएप पर मैसेज किए, तो 23 अप्रैल को पूजा बंसल का एक आखिरी मैसेज आया। उसने लिखा कि वह दो दिन के लिए किसी जरूरी काम से बाहर जा रही है जहां मोबाइल नेटवर्क की समस्या रहेगी। इसके बाद उसका नंबर हमेशा के लिए बंद हो गया।
फेसबुक आईडी डिलीट, अब व्हाट्सएप चैट ही पुलिस का सहारा
जब कई दिनों तक कोई जवाब नहीं मिला, तो घबराए राजेश ने इस पूरी कहानी का जिक्र अपने कुछ करीबी दोस्तों से किया। दोस्तों ने माथा पीटा और उन्हें बताया कि वे एक संगठित साइबर फ्रॉड के चंगुल में फंस चुके हैं। पीड़ित ने जब दोबारा फेसबुक चेक किया, तो आरोपी महिला अपनी आईडी डिलीट कर डिजिटल दुनिया से गायब हो चुकी थी।
मामले की जांच कर रहे साइबर थाना हिसार के एएसआई सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर धारा 318(4) और 61 (BNS) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। भले ही आरोपियों ने अपनी सोशल मीडिया पहचान मिटा दी हो, लेकिन पीड़ित के फोन में मौजूद व्हाट्सएप चैट की पूरी हिस्ट्री और बैंक ट्रांजैक्शन की डिटेल पुलिस के पास सुरक्षित है। पुलिस अब उन पांच बैंक खातों के आईपी एड्रेस और लोकेशन को ट्रैक कर रही है, जिनमें यह रकम ट्रांसफर की गई थी।