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शनि की बदली चाल: 21 मार्च से पलटेगी इन 3 राशियों की किस्मत, दरिद्रता होगी दूर और बरसेगी कृपा

Mar 14, 2026 2:44 PM

ज्योतिष। ग्रहों के मंत्रिमंडल में 'दंडाधिकारी' का दर्जा रखने वाले शनि देव जब अपनी चाल बदलते हैं, तो पूरे ब्रह्मांड की व्यवस्था पर उसका असर पड़ता है। शनि को लेकर जनमानस में एक डर व्याप्त रहता है, लेकिन अनुभवी ज्योतिषी मानते हैं कि शनि केवल दंड ही नहीं देते, बल्कि कर्म प्रधान जातकों को फर्श से अर्श तक भी पहुँचाते हैं। इसी कड़ी में 21 मार्च को शनि एक महत्वपूर्ण नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। वर्तमान में मीन राशि में विराजमान शनि देव उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करेंगे, जो कुछ खास राशियों के लिए 'गोल्डन पीरियड' की शुरुआत साबित हो सकता है।

मेष, सिंह और धनु पर मेहरबान होंगे शनि देव

नक्षत्र परिवर्तन का सबसे सुखद असर मेष राशि पर दिखने वाला है। हालांकि इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है, लेकिन नक्षत्र का यह बदलाव उनके स्वास्थ्य और पुराने विवादों को सुलझाने में मददगार होगा। पिछले कई महीनों से जो काम ऐन वक्त पर बिगड़ रहे थे, उनमें अब गति आएगी।

वहीं सिंह राशि के जातकों के लिए, जो फिलहाल अष्टम शनि (ढैया) का सामना कर रहे हैं, यह परिवर्तन किसी संजीवनी से कम नहीं है। व्यापार में फंसा हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं और कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। रही बात धनु राशि की, तो इनके लिए तो जैसे कामयाबी के द्वार खुलने वाले हैं। तीसरे पद में शनि का जाना इनके आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा और शत्रुओं पर विजय दिलाएगा।

पिता-पुत्र पर विरोधाभासी संबंध

खगोलीय और पौराणिक दृष्टि से देखें तो शनि और सूर्य पिता-पुत्र हैं, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं में दोनों के बीच गहरी शत्रुता मानी जाती है। शनि देव को अपनी एक राशि यात्रा पूरी करने में लगभग 30 साल का लंबा वक्त लगता है। यही कारण है कि उनके छोटे से छोटे बदलाव (नक्षत्र या पद परिवर्तन) का फल जातकों को लंबे समय तक मिलता है। वर्तमान में शनि देव अस्त अवस्था में हैं, फिर भी नक्षत्र के प्रभाव से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

अशुभ प्रभावों से बचने के सरल उपाय

यदि आप शनि की साढ़ेसाती या ढैया के कारण मानसिक तनाव या आर्थिक तंगी महसूस कर रहे हैं, तो शास्त्रों में इसके सटीक उपाय बताए गए हैं। नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ और शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि के क्रूर प्रभावों में कमी आती है। याद रखें, शनि कर्मों के फलदाता हैं, इसलिए इस दौरान सात्विक आचरण और असहायों की मदद करना आपके भाग्य को और अधिक प्रबल बना सकता है।

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