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मार्च 2026 में विवाह के 8 शुभ मुहूर्त, 15 मार्च से पहले निपटाएं शादी

Feb 25, 2026 12:36 PM

March 2026 Wedding Muhurat : मार्च 2026 में विवाह की योजना बना रहे लोगों के लिए हिंदू पंचांग के अनुसार 2 मार्च से 12 मार्च के बीच कुल आठ शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इन तिथियों पर ग्रह, नक्षत्र और वार का अनुकूल संयोग बन रहा है। हालांकि 15 मार्च 2026 से सूर्य के गोचर के कारण खरमास आरंभ हो जाएगा, जिसके बाद मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

मार्च 2026 के आठ शुभ विवाह मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 (सोमवार) को दो शुभ समय उपलब्ध हैं, जिनमें मध्याह्न के बाद से शाम तक विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं। 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को सुबह का समय अनुकूल माना गया है, जबकि 4 मार्च 2026 (बुधवार) को प्रातःकालीन मुहूर्त विशेष शुभ है।

7 मार्च 2026 (शनिवार) से 8 मार्च 2026 (रविवार) तक स्वाति नक्षत्र में विवाह के लिए शुभ संयोग बन रहा है। इसके अलावा 9 मार्च 2026 (सोमवार) को शाम का समय अनुकूल बताया गया है। 11 और 12 मार्च 2026 (बुधवार–गुरुवार) को सुबह के शुरुआती समय में विशेष शुभ योग बन रहे हैं, जिन्हें विवाह के लिए उपयुक्त माना गया है।

मुहूर्त का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हिंदू परंपरा में विवाह केवल सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि धार्मिक संस्कार माना जाता है। मुहूर्त को ऐसी समयावधि के रूप में देखा जाता है, जब ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति जीवन के नए चरण के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

परिवारों में परंपरा रही है कि पंडित या ज्योतिषाचार्य पंचांग देखकर विवाह की तिथि तय करते हैं। मान्यता है कि शुभ समय में संपन्न विवाह से दांपत्य जीवन में सामंजस्य, स्थिरता और समृद्धि की संभावना बढ़ती है।

15 मार्च से शुरू होगा खरमास

15 मार्च 2026 से सूर्य के गोचर के साथ खरमास की शुरुआत होगी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

खरमास लगभग एक माह तक प्रभावी रहता है। इस दौरान नए शुभ कार्यों को टालने की परंपरा रही है, इसलिए 15 मार्च के बाद विवाह की तिथि तय करने से पहले पंचांग की जांच आवश्यक मानी जाती है।

होलाष्टक में विवाह को लेकर परंपराएं

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में ग्रहों की स्थिति अस्थिर मानी जाती है, इसलिए विवाह जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।

मार्च 2026 में 2 और 3 तारीख होलाष्टक की अवधि में आती हैं। उत्तर भारत, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली क्षेत्र में इन दिनों विवाह नहीं किए जाते। हालांकि कुछ ज्योतिषाचार्य विशेष परिस्थितियों या कुंडली में अत्यंत शुभ योग बनने पर शांति पूजन के साथ विवाह की अनुमति देते हैं।

दक्षिण भारत में होलाष्टक की मान्यता उतनी व्यापक नहीं है। वहां इस अवधि में भी विवाह संपन्न होते देखे जाते हैं, जिससे क्षेत्रीय परंपराओं का अंतर स्पष्ट होता है।

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