जींद के अभिषेक ने विश्व योगासना चैंपियनशिप में रचा इतिहास, देश के लिए जीते दो स्वर्ण पदक
Jun 09, 2026 2:37 PM
जींद (दलेर सिंह): खेल की दुनिया में हरियाणा के छोरों का डंका एक बार फिर वैश्विक पटल पर बजा है। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की देखरेख में गुजरात के अहमदाबाद में 4 से 8 जून तक आयोजित की गई पहली 'विश्व योगासना चैंपियनशिप' में जींद के युवा योगासन साधक अभिषेक ने इतिहास रच दिया है। अपनी अप्रतिम खेल प्रतिभा और कड़े संतुलन का प्रदर्शन करते हुए अभिषेक ने इस विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ भारत का मस्तक ऊंचा किया है, बल्कि जींद की माटी का नाम भी दुनिया भर में चमकाया है। उनकी इस दोहरी कामयाबी की खबर जैसे ही जींद पहुंची, वैसे ही खेल प्रेमियों और परिजनों के बीच बधाई देने वालों का तांता लग गया।
आर्टिस्टिक पेयर और ग्रुप स्पर्धा में लगाया सोने का तमगा
मूल रूप से जींद के भिवानी रोड स्थित आत्मा नगर के रहने वाले विनोद कुमार के पुत्र अभिषेक ने प्रतियोगिता के अलग-अलग फॉर्मेट में अपना दबदबा बनाया। उन्होंने राजस्थान के अपने साथी खिलाड़ी अर्जुन परिहार के साथ जोड़ी बनाकर 'आर्टिस्टिक पेयर स्पर्धा' में पहला स्थान हासिल करते हुए देश को स्वर्ण पदक दिलाया।
अभिषेक की जीत का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। इसके बाद हुई 'आर्टिस्टिक ग्रुप स्पर्धा' में भी उन्होंने अपनी टीम के साथियों—अर्जुन (गुरुग्राम), अर्जुन (राजस्थान), प्रवीण पाठक (उत्तर प्रदेश) और अभय (चंडीगढ़)—के साथ मिलकर ऐसा लाजवाब और सधा हुआ प्रदर्शन किया कि जजों के पास उन्हें गोल्ड मेडल देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
मेडल जीतने का पुराना है रिकॉर्ड, नेशनल गेम्स में भी बिखेरा है जलवा
ऐसा नहीं है कि अभिषेक ने यह मुकाम अचानक हासिल किया है; उनकी अलमारी पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदकों से भरी पड़ी है।
अभिषेक के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उनकी खेल यात्रा बेहद प्रभावशाली रही है:
उन्होंने दिल्ली में आयोजित द्वितीय एशियन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में भी दो स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले थे। इसके अलावा, देश के सबसे प्रतिष्ठित डोमेस्टिक टूर्नामेंट यानी 'नेशनल गेम्स' में भी उनका सिक्का लगातार चलता रहा है। अभिषेक ने 36वें राष्ट्रीय खेलों में रजत, 37वें राष्ट्रीय खेलों में कांस्य और फिर 38वें राष्ट्रीय खेलों में शानदार वापसी करते हुए एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की थी।
"गुरुओं के मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम से मिली सफलता"
इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बेहद विनम्र नजर आ रहे अभिषेक ने अपनी जीत का पूरा श्रेय अपने गुरुओं और सपोर्ट सिस्टम को दिया है। उन्होंने कहा कि योग के क्षेत्र में 'लॉर्ड' और विश्व गुरु के रूप में पहचान रखने वाले डॉ. जयदीप आर्य (चेयरमैन, हरियाणा योग आयोग एवं जनरल सेक्रेटरी, योगासन भारत) के कुशल मार्गदर्शन के बिना यह सफर मुमकिन नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने अपने कोच चंद्रकांत मिश्रा और अंश चौधरी की कड़ी मेहनत तथा अनुज कौशिक व प्रियंका चौधरी से मिली लगातार प्रेरणा और सहयोग को अपनी इस स्वर्णिम सफलता का असली आधार बताया।
अभिषेक की इस गौरवमयी उपलब्धि पर जींद के विभिन्न सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय निवासियों ने खुशी जाहिर करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी ओलंपिक-स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दी हैं।