इंग्लेंड विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाने के नाम पर हड़पे 21 लाख रुपये
Jun 01, 2026 12:17 PM
जींद (दलेर सिंह ) विदेश जाकर पढ़ाई करने और वहां सेटल होने का सपना हरियाणा के युवाओं और उनके परिवारों पर किस कदर भारी पड़ रहा है, इसका एक और दर्दनाक उदाहरण जींद में देखने को मिला है। यहां एक विधवा मां को अपने बेटे को इंग्लैंड (यूके) भेजने की चाहत इस कदर भारी पड़ी कि वह पाई-पाई के लिए मोहताज हो गई। इमीग्रेशन का काम करने वाले एक ही परिवार के तीन शातिरों ने मिलकर महिला से ₹21.50 लाख की मोटी रकम हड़प ली। आरोपियों ने न केवल सुनियोजित तरीके से पैसे ऐंठे, बल्कि धोखाधड़ी का भंडाफोड़ होने पर पीड़ित परिवार को अंजाम भुगतने और जान से मारने की धमकी भी दे डाली। सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
बेटा भेजने के लिए मां ने बेच दिया प्लॉट, उठाया भारी कर्ज
दुर्गा कॉलोनी की रहने वाली राजबाला ने पुलिस को दी शिकायत में अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह अपने बेटे संदीप को उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेजना चाहती थीं। घर की माली हालत ठीक न होने के बावजूद उन्होंने बेटे के भविष्य के लिए अपना एक प्लॉट बेच दिया और रिश्तेदारों से भारी कर्ज उठा लिया। इसके बाद वह अप्रैल 2025 में जींद के डीआरडीए (DRDA) कार्यालय के सामने स्थित 'एक्सपर्ट ओवरसीज' नामक इमीग्रेशन दफ्तर पहुंचीं। वहां उनकी मुलाकात एजेंसी संचालक शीलावती, उसके बेटे रवि और बेटी भावना से हुई। तीनों ने संदीप का दाखिला इंग्लैंड की बेहतरीन यूनिवर्सिटी में कराने का झांसा देकर राजबाला को अपने जाल में फंसा लिया।
बैंक खाते का एक्सेस लिया, किस्तों में ऐंठे ₹24 लाख
ठगी को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने सबसे पहले संदीप का एचडीएफसी (HDFC) बैंक में एक खाता खुलवाया। शातिरों ने चालाकी दिखाते हुए उस खाते में अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कर दिया और संदीप से कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करवा लिए ताकि खाते का पूरा नियंत्रण उनके हाथ में रहे। राजबाला ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग किस्तों में आरोपियों को कुल 24 लाख रुपये दिए थे। इसमें से कुछ रकम बैंक ट्रांसफर, ₹1 लाख फोन-पे और करीब ₹15 लाख नकद दिए गए थे। इसके अलावा एंबेसी की फीस के नाम पर राजबाला के दामाद राजेश के खाते से भी ₹1.29 लाख कटवाए गए थे।
सात समंदर पार जाकर हुआ ठगी का अहसास
इस सलीके से बुने गए जाल का पर्दाफाश तब हुआ, जब संदीप जैसे-तैसे इंग्लैंड पहुंच गया। वहां जब वह यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचा, तो कॉलेज प्रशासन ने उसे यह कहकर बैरंग लौटा दिया कि उसकी तो कोई फीस ही जमा नहीं हुई है और दाखिले की आखिरी तारीख भी कब की निकल चुकी है। पैरों तले जमीन खिसकने के बाद संदीप वापस भारत लौटा। राजबाला ने जब इमीग्रेशन दफ्तर जाकर अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने बदनामी के डर से दबाव में आकर केवल ₹2.50 लाख लौटाए और बाकी के ₹21.50 लाख देने से साफ मुकर गए। दोबारा पैसे मांगने पर उन्हें दफ्तर से धक्के मारकर निकाल दिया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस ने शुरू की इमीग्रेशन सेल के जरिए जांच
मामले के जांच अधिकारी एएसआई (ASI) मुकेश कुमार ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है। पुलिस की इमीग्रेशन सेल और यूके (UK) की संबंधित जांच एजेंसी से आधिकारिक पत्राचार और तमाम दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के बाद ही पुलिस ने यह कदम उठाया है। फिलहाल शीलावती, रवि और भावना के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों और दफ्तर के रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे अब तक ऐसे कितने और युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बना चुके हैं।