Search

Meenakshi Goyat : मीनाक्षी गोयत बोलीं: "यह मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत, आखिरी सांस तक लड़ने का था इरादा"

Jun 01, 2026 1:57 PM

जींद। हरियाणा के जींद की मिट्टी ने देश को कई नामी पहलवान दिए हैं, लेकिन हाल ही में कुश्ती के अखाड़े से जो खबर आई उसने पूरे देश के खेल प्रेमियों को हैरान कर दिया। देश की सबसे सीनियर और धाकड़ पहलवान विनेश फोगाट को पटखनी देकर सुर्खियों में आईं मीनाक्षी गोयत इन दिनों हर तरफ छाई हुई हैं। अपनी इस अभूतपूर्व सफलता पर खुलकर बात करते हुए मीनाक्षी ने इसे अपने खेल जीवन की अब तक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जीत बताया है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुकाम को छूने के लिए उन्होंने दिन-रात पसीना बहाया है और आज उसी त्याग का मीठा फल उन्हें मिला है।

"बिना आत्मविशवास के सब बेमानी" — सफलता के पीछे की कहानी

जीत के बाद अपनी खुशी साझा करते हुए मीनाक्षी ने कहा कि बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ मैट पर उतरने से पहले आधे से ज्यादा मुकाबला आपके दिमाग में खेला जाता है। उन्होंने बताया:

"यह मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत है। इसके पीछे मेरी सालों की वो कड़ी मेहनत है जो मैंने बंद कमरों और अखाड़ों में की है। मैं बिना रुके लगातार अभ्यास कर रही थी। खेल की दुनिया में एक बात साफ है— अगर आपको खुद पर भरोसा नहीं है, तो आपकी सारी तैयारी बेमानी है। मुझे खुद पर पूरा यकीन था और इसी आत्मविश्वास के दम पर मैं इतिहास पलट सकी।"

मीनाक्षी ने अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने परिवार और कोच को दिया, जिनके मार्गदर्शन और सहयोग के बिना उनका यहाँ तक पहुँचना नामुमकिन था।

बड़े नामों से डरना कैसा? 'आखिरी सांस तक लड़ने' के इरादे से उतरी थीं मीनाक्षी

जब मीनाक्षी से पूछा गया कि विनेश फोगाट जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चैंपियन के खिलाफ खेलते वक्त उनके दिमाग में क्या चल रहा था, तो उन्होंने बेहद परिपक्व जवाब दिया। मीनाक्षी ने कहा कि उन्होंने मैच की शुरुआत से पहले खुद से सिर्फ एक ही वादा किया था कि चाहे जो हो जाए, सामने वाले का नाम देखकर घबराना नहीं है। रणनीति सिर्फ इतनी थी कि आखिरी सांस तक अपनी पूरी ताकत झोंक देनी है। उन्होंने कहा कि बड़े मुकाबलों में धैर्य बनाए रखना और मानसिक रूप से मजबूत होना उतना ही जरूरी है, जितना कि शारीरिक रूप से फिट होना।

विनेश की गलतियों से पकड़ने का हुनर और भविष्य का मेगा प्लान

ओलंपियन विनेश फोगाट के साथ मुकाबला खेलने के अनुभव को मीनाक्षी एक बेहतरीन पाठशाला मानती हैं। उन्होंने विनेश की सराहना करते हुए कहा कि वे एक कमाल की पहलवान हैं और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। अमूमन मैचों में खिलाड़ी अपनी छोटी-मोटी गलतियों को संभाल लेते हैं, लेकिन विनेश जैसी चालाक रेसलर के सामने एक पल की चूक भी भारी पड़ सकती है।

इस ऐतिहासिक मुकाबले को पीछे छोड़ अब मीनाक्षी का पूरा फोकस भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर टिक गया है। उन्होंने अपने आगामी लक्ष्यों को लेकर साफ किया कि अब उनका एकमात्र निशाना वर्ल्ड चैंपियनशिप में तिरंगा फहराना और देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतना है। जूनियर खिलाड़ियों को संदेश देते हुए मीनाक्षी ने कहा कि मेहनत और खुद पर यकीन रखो, फिर दुनिया का कोई भी सूरमा आपके सामने टिक नहीं पाएगा।

You may also like:

Please Login to comment in the post!