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चिलचिलाती धूप से आखें हो रहीं लाल और ड्राई, कैथल अस्पताल की डॉक्टर कविता गोयल ने दी बड़ी चेतावनी

Jun 10, 2026 11:14 AM

कैथल। कैथल समेत पूरे अंचल में इन दिनों सूर्य देव आग उगल रहे हैं। आसमान से बरसती इस भीषण तपिश और धूल भरी गर्म हवाओं ने न सिर्फ जनजीवन की रफ्तार रोकी है, बल्कि मानव शरीर के सबसे संवेदनशील अंग यानी 'आंखों' को भी अपनी जद में ले लिया है। स्थानीय नागरिक अस्पताल से आ रही रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ दिनों में आंखों से संबंधित संक्रमण और दिक्कतों के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित उछाल आया है। अस्पताल का नेत्र रोग वार्ड इन दिनों मरीजों से खचाखच भरा है, जहां सुबह से ही पर्ची कटवाने और डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीजों की जद्दोजहद शुरू हो जाती है।

ओपीडी का आंकड़ा 350 के पार, कतारों में बीत रहा वक्त

अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर खंगालने पर पता चलता है कि सामान्य मौसम में जहां रोजाना औसतन 200 से 250 मरीज आंखों की जांच के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह ग्राफ बढ़कर 350 प्रति दिन तक पहुंच गया है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टर्स और सपोर्ट स्टाफ मुस्तैद हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के बीच मरीजों के इस भारी दबाव के चलते जांच प्रक्रिया में सामान्य से अधिक समय लग रहा है। कई बुजुर्गों और ग्रामीण इलाकों से आए मरीजों को अपनी बारी के इंतजार में बेंचों और गैलरी में लंबा वक्त काटना पड़ रहा है।

40% मामलों की जड़ में 'लू' का प्रकोप: डॉ. कविता गोयल

नागरिक अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता गोयल ने इस मौसमी बदलाव और बीमारियों के पैटर्न पर बात करते हुए बताया कि हर साल मई से जुलाई के बीच आंखों की ओपीडी में ऐसा ट्रेंड देखने को मिलता है।

डॉ. गोयल ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा:

"फिलहाल जो मरीज आ रहे हैं, उनमें से करीब 40 फीसदी सीधे तौर पर हीटवेव (लू) और वातावरण में उड़ती धूल का शिकार हैं। गर्म हवाएं आंखों की प्राकृतिक नमी को सोख लेती हैं, जिससे 'ड्राई आईज' की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा आंखों में तेज जलन, लालपन और खुजली (एलर्जी) की शिकायतें आम हैं। चूंकि जांच का काम बेहद संजीदगी से करना होता है, इसलिए संख्या अधिक होने पर मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है, पर हम हर एक मरीज को अटेंड कर रहे हैं।"

डॉक्टरों की दो टूक: 'मेडिकल स्टोर की दवाओं से बचें, चश्मा लगाएं'

बदलते मौसम के इस दौर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को सचेत रहने की सलाह दी है। डॉ. कविता गोयल के मुताबिक, अक्सर लोग आंखों में लाली या जलन होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के नजदीकी मेडिकल स्टोर से कोई भी आई-ड्रॉप खरीदकर डाल लेते हैं। यह आदत बेहद खतरनाक साबित हो सकती है और आंखों की रोशनी को परमानेंट नुकसान पहुंचा सकती है।

चिकित्सकों ने बचाव के बेहद व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं:

जब भी बहुत जरूरी होने पर दोपहर में घर से बाहर निकलें, तो अच्छी क्वालिटी का यूवी-प्रोटेक्टेड (UV-Protected) चश्मा जरूर लगाएं।

दिन में 3 से 4 बार साफ और ठंडे पानी से आंखों को हल्के छपाके मारकर धोएं।

आंखों को गंदे हाथों से बार-बार न रगड़ें। अगर जरा सी भी चुभन या दर्द महसूस हो, तो तुरंत नागरिक अस्पताल आकर विशेषज्ञ डॉक्टर से ही ओपीडी में निशुल्क जांच करवाएं।

प्रशासनिक स्तर पर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वे इस मौसमी भीड़ को देखते हुए ओपीडी काउंटरों और वेटिंग एरिया में अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि तपती गर्मी में इलाज के लिए आए मरीजों को थोड़ी राहत मिल सके।

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