Search

नगर परिषद में फर्जीवाड़े का खेल: पिता की मौत की तारीख बदल हड़पना चाहता था दस्तावेज, कैथल में धोखाधड़ी की FIR दर्ज

May 02, 2026 1:30 PM

कैथल (जग मार्ग)। सरकारी रिकॉर्ड और जन्म-मृत्यु पंजीकरण शाखा की आंखों में धूल झोंककर दस्तावेजों में हेराफेरी करने की कोशिश अब एक युवक को महंगी पड़ गई है। कैथल नगर परिषद में अपने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गलत जानकारी देने और श्मशान घाट की रसीद में छेड़छाड़ करने के आरोपी सुनील मदान के खिलाफ थाना शहर पुलिस ने शिकंजा कसा है। प्रशासनिक जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

एक शिकायत ने खोल दिया फर्जीवाड़े का कच्चा चिट्ठा

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब सुभाष नगर के एक व्यक्ति ने नगर परिषद में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रताप गेट निवासी सुनील मदान ने अपने पिता नरेंद्र कुमार की मृत्यु से संबंधित जो दस्तावेज जमा कराए हैं, वे फर्जी हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संदीप सोलंकी ने जन्म-मृत्यु शाखा को दस्तावेजों की विस्तृत जांच के आदेश दिए।

6 महीने का अंतर: रसीद में कांट-छांट कर बदली तारीख महीने का अंतर: रसीद में कांट-छांट कर बदली तारीख

जांच में जो तथ्य सामने आए, वे हैरान करने वाले थे। आरोपी सुनील मदान ने साल 2023 में पंजीकरण के लिए जो आवेदन दिया था, उसमें मृत्यु की तिथि 3 जुलाई 2023 दर्शाई गई थी। लेकिन जब टीम ने श्मशान घाट के रिकॉर्ड और वहां से जारी मूल रसीद की पड़ताल की, तो पता चला कि नरेंद्र कुमार का अंतिम संस्कार 3 जनवरी 2023 को हुआ था। आरोपी ने श्मशान घाट की रसीद में तिथि के साथ छेड़छाड़ की थी ताकि वह अपनी मर्जी के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल कर सके।

पार्षद के बयान और रिकॉर्ड से फंसा आरोपी

जांच को पुख्ता करने के लिए संबंधित वार्ड पार्षद के बयान भी दर्ज किए गए, जिन्होंने स्पष्ट किया कि मृत्यु की वास्तविक तारीख जनवरी में ही थी। श्मशान भूमि की सत्यापित प्रतियों और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर यह साफ हो गया कि परिषद को गुमराह करने के लिए जानबूझकर दस्तावेजों को बदला गया। थाना शहर प्रभारी गीता रानी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि नगर परिषद की शिकायत पर आरोपी सुनील मदान के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि तारीख बदलने के पीछे आरोपी का असली मकसद क्या था—क्या यह किसी संपत्ति विवाद या सरकारी लाभ लेने की साजिश का हिस्सा था?


You may also like:

Please Login to comment in the post!