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कैथल में सफाई कर्मचारियों का बड़ा ऐलान, 24 मई को मंत्री कृष्ण बेदी के दफ्तर का करेंगे घेराव

May 22, 2026 11:08 AM

कैथल। हरियाणा के कैथल में अपनी अनदेखी से नाराज ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में जुटे सफाईकर्मियों ने लघु जिला सचिवालय के पार्क में इकट्ठा होकर अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। दिनभर चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर समय रहते उनकी सुध नहीं ली गई, तो 24 और 25 मई को सूबे के समाज कल्याण मंत्री कृष्ण बेदी के विधानसभा कार्यालय पर ऐतिहासिक महापड़ाव डाला जाएगा, जहां से एक बड़े और निर्णायक आंदोलन की रणनीति तय होगी।

'20 साल सेवा के बाद भी भविष्य असुरक्षित'

सचिवालय में धरने पर बैठे कर्मचारी वीरभान, सत्यवान, संतरो, संतोष और अनिता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से गांवों की गलियों को साफ रखने का काम कर रहे हैं। इस लंबी अवधि के बाद भी सरकार उन्हें स्थायी करने को तैयार नहीं है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने पहले उन्हें पक्का करने का भरोसा जरूर दिया था, लेकिन आज तक इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। इस प्रशासनिक उपेक्षा के चलते सैकड़ों परिवार आज आर्थिक तंगी और सामाजिक असुरक्षा के दौर से गुजरने को मजबूर हैं।

आबादी के अनुपात में नहीं बढ़े कर्मचारी, बढ़ा काम का दबाव

प्रदर्शनकारियों ने गांवों में मैनपावर की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। नियमों के मुताबिक हर 400 की आबादी पर एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन कैथल के कई बड़े गांवों में धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। हजारों की आबादी वाले गांवों में महज एक सफाईकर्मी के भरोसे पूरा काम छोड़ दिया गया है। इसके चलते कर्मियों पर काम का मानसिक और शारीरिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और गांवों में सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों ने मांग की है कि आबादी के तय फार्मूले के आधार पर तुरंत नए पदों को भरा जाए।

समान काम-समान वेतन और शहरी तर्ज पर सुविधाओं की मांग

ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने अपनी मुख्य मांगों को दोहराते हुए कहा कि जब तक उन्हें नियमित (पक्का) नहीं किया जाता, तब तक 'समान काम-समान वेतन' के सिद्धांत के तहत पूरा मानदेय दिया जाए। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले इन कर्मचारियों को भी शहरी सफाईकर्मियों की तरह तमाम बुनियादी सुविधाएं और भत्ते दिए जाएं। सफाईकर्मियों ने साफ कर दिया है कि अब वे आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं और अपनी हक की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाकर ही दम लेंगे।

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