युवक की डोंकी रूट की खौफनाक कहानी: 9 लाख देकर फंसे, पाकिस्तानी एजेंटों ने जबरन बीफ खिलाने की कोशिश की
Jun 16, 2026 10:28 AM
कैथल। कैथल के एक साधारण परिवार के युवक ने जब अपने घर की तंगहाली को दूर करने और मां-बाप को एक बेहतर जिंदगी देने का सपना देखा, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह ख्वाब उसके लिए एक कभी न भूलने वाला डरावना सच बन जाएगा। इलाके के ही कुछ शातिर ट्रैवल एजेंटों ने युवक को झांसा दिया कि वे उसे महज 9 लाख रुपये में पूरी तरह वैध तरीके से, फ्लाइट के जरिए यूरोप पहुंचा देंगे। घर की जमीन और जमापूंजी दांव पर लगाकर परिवार ने एजेंटों को रकम सौंप दी।
पैसे ऐंठने के बाद कबूतरबाजों ने अपना असली रंग दिखाया। युवक को सीधे रास्ते भेजने के बजाय धोखे से 'डोंकी रूट' यानी जंगलों, पहाड़ों और अवैध रास्तों के जरिए मौत के सफर पर धकेल दिया गया। यह रूट इंसानी तस्करी का वो दलदल है जहां एक बार फंसने के बाद वापसी की राह लगभग नामुमकिन हो जाती है।
-4 डिग्री तापमान में पाकिस्तानी एजेंटों का टॉर्चर और बीफ का दबाव
युवक जैसे-तैसे जब तुर्की और ग्रीस के बेहद खतरनाक बॉर्डर के पास पहुंचा, तो वहां का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां का तापमान -4 डिग्री सेल्सियस था और युवक के पास बदन ढकने के लिए कोई गर्म कपड़ा तक नहीं था। कड़ाके की इस ठंड के बीच उसे एक बेहद तंग कस्टडी में बंद कर दिया गया। युवक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उस कस्टडी को चलाने और वहां नजर रखने का जिम्मा पाकिस्तानी मूल के खूंखार एजेंटों के पास था।
वहां बंद भारतीय युवकों पर पाकिस्तानी एजेंटों ने जुल्म की सारी हदें पार कर दीं। युवक का संगीन आरोप है कि वहां उन्हें खाने के नाम पर जबरन बीफ (गोमांस) परोसा जाता था और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की जाती थी। जब कैथल के इस युवक ने बीफ खाने से साफ इनकार कर दिया, तो पाकिस्तानी एजेंटों ने उसे लाठी-डंडों से बेतहाशा पीटा और तड़पने के लिए छोड़ दिया।
कालकोठरी का नरक और आर्मी का अमानवीय रवैया
प्रताड़ना के इस दौर के बीच जब युवक ने जान बचाने के लिए बॉर्डर पार करने की कोशिश की, तो विदेशी सुरक्षा बलों की उन पर नजर पड़ गई। अवैध घुसपैठ के आरोप में युवक को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद शुरू हुआ जेल का वो सफर जो पूरे 7 महीने तक खिंचा। विदेशी जेल की एक अंधेरी कालकोठरी में युवक बिना किसी कानूनी मदद के सात महीनों तक घुट-घुट कर जीता रहा।
हद तो तब हो गई जब जेल की अवधि खत्म होने के बाद वहां की आर्मी ने उसे कानूनी तरीके से भारत डिपोर्ट करने के बजाय, बेहद अमानवीय ढंग से वापस उसी खतरनाक बॉर्डर के पार धकेल दिया। वहां से मौत के मुंह से निकलते हुए, भूखा-प्यासा यह युवक जैसे-तैसे कड़े संघर्ष के बाद वापस भारत अपने घर पहुंच सका है। युवक की इस आपबीती ने एक बार फिर हरियाणा में पैर पसार चुके 'डोंकी रूट' के जानलेवा रैकेट का काला सच उजागर कर दिया है।