सावधान! देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल छीन रहा आपकी नींद और सुकून, कैथल में बढ़े डिप्रेशन के मामले
May 04, 2026 12:48 PM
कैथल (जग मार्ग)। आधुनिकता की दौड़ और हर हाथ में मोबाइल की सुलभता अब वरदान कम और अभिशाप ज्यादा साबित होने लगी है। कैथल जिले में मानसिक रोगों के ग्राफ में आया उछाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का सबब बन गया है। आलम यह है कि नागरिक अस्पताल और निजी क्लीनिकों की ओपीडी में हर दिन 30 से ज्यादा ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो घबराहट, बेचैनी और अनिद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मरीजों में बुजुर्गों से कहीं ज्यादा तादाद युवाओं की है।
नींद और सुकून के बीच दीवार बना 'स्मार्टफोन'
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विनय कुमार के मुताबिक, मानसिक असंतुलन की इस सुनामी के पीछे सबसे बड़ा कारण देर रात तक मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल है। वे बताते हैं कि मोबाइल से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' न केवल आंखों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मस्तिष्क में नींद के लिए जिम्मेदार 'मेलाटोनिन' हार्मोन के चक्र को भी बिगाड़ देती है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो उसका सीधा असर स्वभाव पर पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव और अंततः अवसाद (डिप्रेशन) जन्म लेने लगता है।
अकेलेपन का शिकार हो रही है 'कनेक्टेड' पीढ़ी
आज का युवा सोशल मीडिया पर तो हजारों लोगों से जुड़ा है, लेकिन असल जिंदगी में वह अकेला होता जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि परिवार के साथ संवाद की कमी और घंटों वर्चुअल दुनिया में खोए रहने से युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा है। पढ़ाई और करियर का गलाकाट कंपटीशन इस आग में घी का काम कर रहा है। इसके साथ ही शारीरिक मेहनत का अभाव और जंक फूड पर बढ़ती निर्भरता दिमाग को वह पोषण नहीं दे पा रही, जिसकी उसे जरूरत है।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. विनय कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि अक्सर लोग घबराहट या बेचैनी को सामान्य मानकर टाल देते हैं, लेकिन यही छोटी समस्याएं आगे चलकर गंभीर मनोरोग का रूप ले लेती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारी कोई 'कलंक' नहीं है, बल्कि अन्य शारीरिक बीमारियों की तरह इसका भी डॉक्टरी परामर्श और सही इलाज संभव है।
बचाव के लिए क्या करें?
डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और गैजेट्स से दूरी बना लें।
संवाद बढ़ाएं: वर्चुअल चैटिंग के बजाय परिवार और दोस्तों के साथ आमने-सामने बैठकर बात करें।
दिनचर्या में सुधार: संतुलित आहार लें और कम से कम 30 मिनट शारीरिक व्यायाम या योग को दें।
नींद से समझौता नहीं: मानसिक स्वास्थ्य के लिए 7 से 8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है।
कैथल के स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि समय रहते सामाजिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता नहीं फैलाई गई, तो आने वाली पीढ़ी के लिए यह एक बड़ा संकट बन सकता है। अब समय आ गया है कि हम अपनी उंगलियों को मोबाइल की स्क्रीन से हटाकर वास्तविक जीवन की खुशियों की ओर मोड़ें।