नीलोखेड़ी में किसानों की महापंचायत: भारत-अमेरिका कृषि समझौते पर उठाए सवाल, शर्तें सार्वजनिक करने की मांग
Jun 06, 2026 3:52 PM
नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)। हरियाणा के कृषि प्रधान बेल्ट करनाल के नीलोखेड़ी ब्लॉक के गांव जाम्बा में भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक महज एक औपचारिक प्रशासनिक चर्चा न रहकर, सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों के गुस्से का मंच बन गई। ब्लॉक प्रधान धर्म सिंह मैहला की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में न केवल खेती-किसानी से जुड़े बल्कि आम आदमी की कमर तोड़ रही महंगाई और बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी तीखी बहस हुई। बैठक के केंद्र में रहे भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य, जिन्होंने सिलसिलेवार ढंग से कृषि क्षेत्र में आ रही गिरावट और किसानों की बदहाली का खाका खींचा।
कच्चे तेल का खेल और युवाओं का विदेशों में पलायन
बैठक को संबोधित करते हुए सेवा सिंह आर्य ने वैश्विक बाजार और घरेलू महंगाई के विरोधाभास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें निचले स्तर पर होने के बाद भी सरकार पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडरों के दाम कम करने को तैयार नहीं है। यह सीधे तौर पर किसान और आम उपभोक्ता की जेब पर डाका है।
बेरोजगारी पर बोलते हुए उन्होंने एक बेहद संवेदनशील नस को छुआ। आर्य ने कहा कि देश में रोजगार के अवसर खत्म होने की वजह से आज हरियाणा और पंजाब का युवा जान जोखिम में डालकर 'डंकी' (अवैध रास्तों) या अन्य जरियों से विदेशों की तरफ पलायन करने को मजबूर है। अगर समय रहते सरकार ने यहां रोजगार के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो हमारे गांव युवाओं से खाली हो जाएंगे।
नकली खाद-बीज का सिंडिकेट और भारत-अमेरिका समझौता
किसान नेताओं ने बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे नकली कीटनाशकों, घटिया खाद और नकली बीजों पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन की नाक के नीचे यह सिंडिकेट फल-फूल रहा है। फसल खराब होने पर सारा आर्थिक बोझ किसान के सिर आ जाता है, जबकि दोषी कंपनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
इसके साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए कृषि समझौते को लेकर भी बैठक में आशंकाएं जताई गईं। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि इस समझौते के बंद कमरों वाले फैसलों को सार्वजनिक किया जाए। किसानों को यह जानने का पूरा हक है कि इस नीति से उनकी जमीन और फसल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा; अगर यह जरा भी किसान विरोधी पाया गया, तो यूनियन इसका पुरजोर विरोध करेगी।
ड्रेन की गहरी खुदाई और लंबित बिजली कनेक्शनों पर घेरा
स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए ब्लॉक प्रधान धर्म सिंह मैहला ने ड्रेन (नालों) की हो रही अवैज्ञानिक और अत्यधिक गहरी खुदाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तय मानकों से ज्यादा गहराई में की जा रही यह खुदाई किनारे के खेतों को तो नुकसान पहुंचा ही रही है, साथ ही रात-बिरात पशुओं और राहगीरों के लिए भी मौत का कुआं साबित हो सकती है।
इसके अलावा, जिन किसानों ने सालों पहले अपने ट्यूबवेल कनेक्शनों के लिए पूरी सरकारी फीस जमा करा दी थी, उन्हें आज तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों ने मांग की कि फसल बीमा योजना के तहत काटी जाने वाली किस्त की पूरी पॉलिसी कॉपी उन्हें सौंपी जाए, ताकि नुकसान के समय उन्हें पता हो कि किस कंपनी से क्लेम मांगना है।
इस मौके पर संगठन को मजबूत करने और हक की लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया गया। बैठक में मुख्य रूप से ईश्वर चंद शर्मा, कोषाध्यक्ष सरदार महिंदर सिंह, बलदीर सिंह, रामधारी, सचिव राजेंद्र और केशों राम शर्मा सहित बड़ी संख्या में इलाके के किसान मौजूद रहे।