उम्र नहीं, श्रद्धा की गहराई देखते हैं ईश्वर: ध्रुव-प्रहलाद की भक्ति का उदाहरण दे झूम उठे श्रद्धालु
Jun 04, 2026 2:20 PM
नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)। हरिद्वार में गंगा की लहरों के बीच गूंज रहे श्रीमद्भागवत के श्लोकों के बीच महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वामी जी ने भक्ति मार्ग की सहजता को समझाते हुए कहा कि भगवान को रिझाने के लिए किसी विशेष उम्र या बहुत बड़े पांडित्य की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने पौराणिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि महज पांच-छह वर्ष की अल्पायु में बालक ध्रुव ने जिस अटूट विश्वास के साथ कठिन तपस्या की, उसने सृष्टि के नियंता को भी धरती पर आने के लिए मजबूर कर दिया था। भगवान केवल भाव के भूखे हैं और जब कोई भक्त बिना किसी स्वार्थ और कपट के समर्पण करता है, तो परमात्मा स्वयं उसके दर्शन करने के लिए लालायित हो उठते हैं।
मोबाइल और भौतिकता के जाल से बच्चों को निकालना जरूरी
आज की पीढ़ी के भटकाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी ज्ञानानंद जी ने उपस्थित अभिभावकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल के समृद्ध भारत का निर्माण करेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें बचपन से ही नैतिक और सामाजिक मूल्यों की घुट्टी पिलानी होगी। उन्होंने पिताओं और माताओं से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को मोबाइल स्क्रीन और भौतिकता के दिखावे वाली दुनिया से थोड़ा दूर करें। यदि माता-पिता स्वयं सत्य, धर्म और सदाचार के रास्ते पर चलेंगे, तो बच्चे बिना किसी उपदेश के स्वतः ही उन आदर्शों को अपना लेंगे।
अर्जुन का अवसाद दूर करने वाली गीता आज भी प्रासंगिक
गीता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करते हुए गीतामनीषी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता को केवल पूजाघर में लाल कपड़े में बांधकर रखने के बजाय जीवन के आचरण में उतारना होगा। जब कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन मोह, निराशा और अवसाद के गहरे गर्त में डूब गए थे, तब योगेश्वर श्रीकृष्ण के मुख से निकले वचनों ने उनके भीतर साहस और आत्मबल का संचार किया था। आज का इंसान भी आधुनिक जीवन की कशमकश में रोज एक नए मानसिक युद्ध से गुजर रहा है। ऐसे में गीता का ज्ञान एक ऐसी संजीवनी है, जो व्यक्ति को कभी हताश, निराश या विचलित नहीं होने देती।
हरिद्वार की पावन धरा पर नीलोखेड़ी के श्रद्धालुओं का जमघट
श्री कृष्ण कृपा धाम में इन दिनों भक्ति का अनूठा संसार बसा हुआ है। प्रख्यात भागवताचार्य श्रीराम मुद्गल शास्त्री की रसपूर्ण वाणी से बह रही कथा की रसधार में गोता लगाने के लिए हरियाणा के नीलोखेड़ी और आसपास के इलाकों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे हैं।
इस आध्यात्मिक समागम में मुख्य रूप से मार्केट कमेटी के चेयरमैन शिव नाथ कपूर, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष बलराम कपूर, तिलक राज अरोड़ा और प्रख्यात भजन गायक रतन रसिक सहित कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सत्संग पंडाल में पूरा दिन भजन-कीर्तन की गूंज से माहौल पूरी तरह कृष्णमय और आलौकिक बना रहा।