Karnal Dhan Ghotala: करनाल खाद्य एवं आपूर्ति दफ्तर में एसआईटी का डेरा, कई अहम फाइलें गायब होने से मचा हड़कंप
May 31, 2026 11:43 AM
करनाल। हरियाणा के करनाल में हुए करोड़ों रुपये के धान और सरकारी चावल घोटाले की परतें अब तेजी से उघड़ने लगी हैं। मामले की तह तक जाने के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) ने अब सीधे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) कार्यालय को ही अपना जांच केंद्र बना लिया है। एसआईटी की टीमें हर रोज दफ्तर पहुंचकर धान के उठाान, मिलिंग और गोदामों में चावल जमा होने से जुड़े एक-एक दस्तावेज को बारीकी से खंगाल रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस जांच की आंच जल्द ही विभाग के कुछ बड़े चेहरों और रसूखदार राइस मिल मालिकों तक पहुंचने वाली है।
कागजी घोड़ों और जमीनी हकीकत के बीच के फासले को ढूंढ रही पुलिस
जांच के केंद्र में फिलहाल वो फाइलें और फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) की रिपोर्ट हैं, जिनके दम पर कागजों में तो हजारों टन धान और चावल मौजूद दिखाया गया, लेकिन असल में गोदाम खाली पड़े थे। एसआईटी के जांच अधिकारी पुराने रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, मिलों को जारी गेट पास, ट्रांसपोर्टेशन की रसीदें और विभागीय पत्राचार की कॉपियां जुटाने में लगे हैं। सूत्रों की मानें तो पड़ताल के दौरान कई ऐसी महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज रिकॉर्ड से गायब मिले हैं, जिनका जिक्र विभाग की दूसरी रिपोर्टों में तो है, लेकिन उनकी मूल कॉपियां दफ्तर से नदारद हैं। इसी वजह से पुलिस को बार-बार कर्मचारियों से तीखे सवाल-जवाब करने पड़ रहे हैं।
बर्खास्त सहायक निरीक्षक ने उगल दिए नेक्सस के राज
इस पूरे मामले में तब बड़ा मोड़ आया, जब हाल ही में बर्खास्त किए गए एक सहायक निरीक्षक (असिस्टेंट इंस्पेक्टर) से पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की। रिमांड के दौरान इस पूर्व कर्मचारी ने उन तमाम राइस मिलर्स और विभागीय अधिकारियों के नाम उगल दिए हैं, जो इस पूरे खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड थे। इस खुलासे के बाद से ही अनाज मंडी और विभागीय गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि सरकारी धान को खुले बाजार में बेचने और उसकी जगह कागजी खानापूर्ति करने का यह खेल किस स्तर पर चल रहा था।
जांच में पूरा सहयोग कर रहा है विभाग: डीएफएससी मुकेश कुमार
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि विभाग इस घोटाले को लेकर पूरी तरह गंभीर है और पुलिस की जांच टीम को हर संभव मदद दी जा रही है। एसआईटी के अधिकारी जब भी और जो भी रिकॉर्ड मांगते हैं, उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
कइयों पर गिरेगी गाज, लापरवाही या जानबूझकर की गई हेराफेरी?
जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जिन मिलों में रिकॉर्ड के अनुसार भारी मात्रा में धान का स्टॉक दिखाया गया था, वहां अधिकारियों ने बिना मौके पर जाए किस आधार पर 'सब ठीक है' की रिपोर्ट तैयार कर दी। जानकारों का मानना है कि जैसे ही विभागीय दस्तावेजों और मौके की रिपोर्ट का अंतिम मिलान पूरा होगा, कागजी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकेट का यह बड़ा अंतर साफ हो जाएगा। इसी अंतिम रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि यह सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही थी या फिर जानबूझकर अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया एक सोचा-समझा महाघोटाला था।