नीलोखेड़ी के गांवों में सफाई का महाअभियान: 12 साल पूरे होने पर पंचायत अधिकारी साहिब सिंह ने संभाली कमान
Jun 16, 2026 4:21 PM
नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)। सरकारी आयोजनों को अक्सर दफ्तरों और भाषणों तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन नीलोखेड़ी खंड में केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के जश्न को एक अलग और सकारात्मक अंदाज में मनाया जा रहा है। प्रशासन ने इस मौके को ग्रामीण अंचल की आबोहवा सुधारने के अवसर के रूप में चुना है। खंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में शुरू किया गया विशेष स्वच्छता अभियान अब धीरे-धीरे एक जन आंदोलन की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है।
इस मुहिम की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक तैयारियों को साझा करते हुए खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) साहिब सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की मजबूती के साथ-साथ वहां का वातावरण स्वच्छ रखना बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ सड़कों, गलियों, सार्वजनिक स्थलों और सामुदायिक केंद्रों में सफाई का विशेष ढांचा तैयार किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में नालियों की सही सफाई न होने से बीमारियां पनपती हैं, लिहाजा इस बार नालियों की गाद निकालने और कचरों के सही निस्तारण पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
फील्ड में उतरी टीम, लापरवाहों पर कसी जा रही नकेल
प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी निगरानी के लिए बीडीपीओ ने खुद कमान संभालने के साथ-साथ खंड समन्वयक रेनू को फील्ड कमांडर की जिम्मेदारी सौंपी है। रेनू हर रोज अलग-अलग ग्राम पंचायतों का औचक निरीक्षण कर रही हैं। वे न सिर्फ सफाई कर्मचारियों की हाजिरी और उनके काम को देख रही हैं, बल्कि मौके पर मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों (सरपंचों और पंचों) से संवाद कर रही हैं। जहां भी काम में ढिलाई दिख रही है, वहां संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को तुरंत मौके पर ही जरूरी दिशा-निर्देश और चेतावनी दी जा रही है।
"सिर्फ सरकार का काम नहीं स्वच्छता": बीडीपीओ की ग्रामीणों से मार्मिक अपील
बीडीपीओ साहिब सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई भी देश या गांव तब तक साफ नहीं हो सकता, जब तक कि वहां का आम नागरिक खुद झाड़ू उठाने या अपने घर का कचरा सही जगह फेंकने की जिम्मेदारी न समझे। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा, "स्वच्छता कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे ऊपर से थोपा जाए, यह हमारी जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए।"
अभियान के दौरान पंचायतों में चौपालें लगाकर लोगों को स्वच्छ पेयजल की अहमियत, जल संरक्षण और संक्रामक बीमारियों से बचने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं। इस सरकारी प्रयास का असर भी दिखने लगा है। ग्राम सचिवों और सफाई कर्मियों के साथ अब गांव के युवा और बुजुर्ग भी इस सफाई यज्ञ में अपनी आहुति दे रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर कई गांवों में लोगों ने यह प्रतिज्ञा ली कि वे अपनी गलियों में गंदगी नहीं होने देंगे और खास तौर पर सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करेंगे। प्रशासन का अंतिम लक्ष्य हर गांव को सरकार द्वारा तय किए गए स्वच्छता के ऊंचे मानकों पर खरा उतारना है, ताकि 'स्वच्छ गांव, समृद्ध गांव' का सपना हकीकत में तब्दील हो सके।