नीलोखेड़ी के गांवों में बाल विवाह के खिलाफ हुंकार, सरपंच शक्ति मैहला बोले- बच्चों की सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी
Jun 19, 2026 12:57 PM
नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)। करनाल के नीलोखेड़ी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से बाल अधिकारों को लेकर एक बेहद सकारात्मक पहल सामने आई है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को गति देने और बच्चों के अधिकारों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एम.डी.डी. ऑफ इंडिया और 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' (JRC) संगठन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में गांव माजरा रोड़ान और चकदा में ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति (VLCPC) की विशेष बैठकें बुलाई गईं। इन बैठकों में ग्रामीणों, महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक सुर में बच्चों को सुरक्षित माहौल देने का वादा किया।
माजरा रोड़ान में बोले सरपंच— अधिकारों के हनन पर तुरंत दें सूचना
माजरा रोड़ान में हुई बैठक की कमान संभालते हुए सरपंच शक्ति मैहला ने दोटूक कहा कि गांव के हर बच्चे को सुरक्षित माहौल, बेहतर भविष्य और अच्छी शिक्षा देना किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए अपील की कि यदि आसपास किसी भी बच्चे के अधिकारों का हनन होता दिखे, या उसे प्रताड़ित किया जा रहा हो, तो बिना किसी डर के तुरंत इसकी सूचना बाल संरक्षण समिति या संबंधित सरकारी विभाग को दें।
चकदा में सरपंच मनप्रीत कौर ने उठाई आवाज
दूसरी तरफ, गांव चकदा में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए सरपंच मनप्रीत कौर ने बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति किसी भी तरह के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसे रोकने के लिए पंचायत, स्कूल और अभिभावकों को एक त्रिकोण की तरह मिलकर काम करना होगा। जब तक जमीनी स्तर पर जागरूकता नहीं आएगी, तब तक बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
जमीनी स्तर पर काम करेगी बाल संरक्षण समिति
बैठक में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता महाबीर मैहला ने समिति के कामकाज और उसके अधिकारों का खाका ग्रामीणों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस समिति का असल मकसद गांव के भीतर ही बच्चों की छुपी हुई समस्याओं को पहचानना और उनका निपटारा करना है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं, ऐसे बच्चों को चिन्हित कर सरकारी वजीफे और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। बैठक के आखिर में मौजूद महिलाओं और बुजुर्गों ने संकल्प लिया कि वे अपने गांवों में बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों को सिर नहीं उठाने देंगे।