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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र के उमरी में बनेगी ₹100 करोड़ की राजस्व प्रशिक्षण अकादमी, सीएम सैनी ने दी मंजूरी

Jun 03, 2026 4:45 PM

कुरुक्षेत्र। हरियाणा में जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों, डिजिटल रिकॉर्ड्स और आपदा प्रबंधन के ढर्रे को पूरी तरह बदलने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बड़े प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं। कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गांव उमरी में अब 'हरियाणा राजस्व प्रशिक्षण अकादमी' की स्थापना की जाएगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर मुख्यमंत्री ने फाइल पर अंतिम मुहर लगा दी है। 14 एकड़ के विशाल भूभाग पर बनने वाला यह संस्थान सूबे का पहला ऐसा केंद्र होगा, जो विशेष रूप से राजस्व विभाग के अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मुहैया कराएगा।

बजट 2026-27 का बड़ा वादा पूरा, विपुल गोयल बोले- बदल जाएगी भूमि प्रशासन की सूरत

इस बड़ी कामयाबी पर बात करते हुए हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि यह कदम प्रशासनिक सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया, "इस अकादमी की आधारशिला वित्तीय वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में रखी गई थी। कुरुक्षेत्र जिले से इस संस्थान के लिए कई जमीनों के प्रस्ताव सरकार के पास आए थे, लेकिन तमाम तकनीकी और भौगोलिक पैमानों पर परखने के बाद उमरी ग्राम पंचायत की जमीन को इस एक्सीलेंस सेंटर के लिए सबसे मुफीद पाया गया।" गोयल ने दावा किया कि इस आधुनिक विंग के शुरू होने से भूमि प्रशासन, तकनीकी मैपिंग, जीआईएस (GIS) सिस्टम और सार्वजनिक सेवा वितरण की पुरानी पेचीदगियों से निपटने में अधिकारियों को सीधे मदद मिलेगी।

जीटी रोड पर होने से मिलेगी बेहतरीन कनेक्टिविटी: अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा

राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव और सीनियर आईएएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने परियोजना के तकनीकी और भौगोलिक फायदों का खाका खींचते हुए बताया कि उमरी का चयन बेहद सोच-समझकर किया गया है। यह प्रस्तावित स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (दिल्ली-अमृतसर हाईवे) के ठीक किनारे स्थित है, जिसकी वजह से न केवल हरियाणा के तमाम जिलों बल्कि पंजाब, हिमाचल और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों से भी यहां आना-जाना बेहद सुगम होगा। डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह संस्थान केवल एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं होगा, बल्कि आने वाले समय में राजस्व क्षेत्र में शोध और नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए एक राष्ट्रीय 'उत्कृष्टता केंद्र' (Centre of Excellence) के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

फाइलों के चक्कर और लतीफी से मिलेगी मुक्ति, पटवारी से लेकर तहसीलदार तक होंगे अपग्रेड

दरअसल, हरियाणा सरकार पिछले कुछ समय से जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने और जमीनी विवादों को कम करने के लिए बड़े नीतिगत बदलाव कर रही है। लेकिन फील्ड में तैनात स्टाफ— जैसे पटवारी, कानूनगो और नायब तहसीलदारों को नए डिजिटल सॉफ्टवेयर और कानूनी बारीकियों की समय पर ट्रेनिंग न मिलने के चलते जनता को तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अब इस ₹100 करोड़ की लागत से बनने वाली अकादमी में नवनियुक्त अफसरों के साथ-साथ पुराने स्टाफ के लिए भी रेगुलर रिफ्रेशर कोर्स चलाए जाएंगे। यहां उन्हें सेटेलाइट मैपिंग, ड्रोन सर्वे और आपदा के समय तुरंत राहत पहुंचाने के हाईटेक तौर-तरीके सिखाए जाएंगे, ताकि आम जनता के काम बिना किसी सिफारिश और लेटलतीफी के पूरे हो सकें।

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