दल खालसा के सेनापति जस्सा सिंह अहलूवालिया की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, लिया संकल्प
May 04, 2026 1:13 PM
कुरुक्षेत्र (जग मार्ग)। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के अहलूवालिया चौक पर रविवार को महान सिख योद्धा और कपूरथला रियासत के संस्थापक जस्सा सिंह अहलूवालिया की जयंती पूरे जोश और श्रद्धा के साथ मनाई गई। अहलूवालिया सभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्ध जनों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और संकल्प लिया कि वे उनके दिखाए त्याग और वीरता के मार्ग पर चलेंगे।
माता सुंदरी जी की देखरेख में निखरा व्यक्तित्व
समारोह के दौरान सभा के संरक्षक जिंदर मोहन वालिया ने जस्सा सिंह अहलूवालिया के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 3 मई 1718 को लाहौर के पास अहलू गांव में हुआ था। छोटी उम्र में ही पिता बदर सिंह के साये से महरूम होने के बाद, उनका पालन-पोषण गुरु गोविंद सिंह जी की धर्मपत्नी माता सुंदरी जी के सान्निध्य में दिल्ली में हुआ। यहीं से उन्होंने न केवल शस्त्र विद्या में महारत हासिल की, बल्कि अरबी, फारसी और विभिन्न धर्मग्रंथों का गहरा ज्ञान भी अर्जित किया, जिसने आगे चलकर उन्हें एक दूरदर्शी सैन्य रणनीतिकार बनाया।
दल खालसा के सर्वोच्च सेनापति और हरिमंदिर साहिब का पुनर्निर्माण
अहलूवालिया सभा के प्रधान नरेंद्र वालिया ने भावुक होते हुए कहा कि जस्सा सिंह जी की अदम्य वीरता और नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम था कि 1748 में बैसाखी के पावन पर्व पर उन्हें 'दल खालसा' का सर्वोच्च सैन्य कमांडर नियुक्त किया गया। उनकी इन्हीं महान सेवाओं के कारण उन्हें 'सुल्तान-उल-कौम' की प्रतिष्ठित उपाधि से नवाजा गया। वहीं उप प्रधान अशोक रोशा ने याद दिलाया कि श्री हरिमंदिर साहिब के पुनर्निर्माण में जस्सा सिंह जी के अतुलनीय योगदान को इतिहास के पन्नों से कभी ओझल नहीं किया जा सकता। उन्होंने उस समय सिख पंथ को एकजुट किया जब चुनौतियां पहाड़ जैसी थीं।
समाज के गणमान्य जनों की रही मौजूदगी
इस पावन अवसर पर कुरुक्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों से अहलूवालिया समाज के लोग भारी संख्या में एकत्र हुए। कार्यक्रम में सुभाष वालिया, संजय वालिया, सुरेंद्र वालिया, राजकुमार वालिया और आईपीएस वीरेंद्र वालिया ने भी अपने विचार साझा किए। इसके अलावा गौरांग रोशा, धनंजय रोशा, चिंटू वालिया और अनिरुद्ध वालिया सहित समाज के कई युवाओं ने भी पूर्वजों की विरासत को सहेजने का प्रण लिया।
सभा के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर मांग की कि युवा पीढ़ी को ऐसे महान योद्धाओं के जीवन से अवगत कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। माल्यार्पण के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया और समाज की मजबूती के लिए एकजुट रहने पर जोर दिया गया।