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कुरुक्षेत्र सिविल अस्पताल में पहली बार रोबोट ने किया घुटने का सफल ऑपरेशन, आयुष्मान कार्ड पर हुआ मुफ्त इलाज

May 26, 2026 1:49 PM

कुरुक्षेत्र। हरियाणा की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच कुरुक्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है, जो देश के किसी भी बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल को टक्कर दे सकती है। कुरुक्षेत्र के सिविल अस्पताल में अब रोबोटिक आर्म्स (रोबोटिक तकनीक) के जरिए घुटना प्रत्यारोपण की जटिल सर्जरी शुरू हो चुकी है। अब तक जो तकनीक केवल दिल्ली, मुंबई या मोहाली के चुनिंदा और बेहद महंगे प्राइवेट अस्पतालों तक ही सीमित थी, वह अब सरकारी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) का हिस्सा बन चुकी है। इस सुविधा के आने से उन बुजुर्गों और मरीजों को नया जीवन मिला है, जो पैसों के अभाव में सालों तक घुटनों का दर्द सहने को मजबूर थे।

रोबोटिक तकनीक का कमाल: कम दर्द, छोटा चीरा और तुरंत वॉक

अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनु सोनी ने इस हाईटेक तकनीक की बारीकियों और फायदों को साझा किया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक तौर पर होने वाले ऑपरेशन के मुकाबले रोबोटिक सर्जरी कई गुना ज्यादा सुरक्षित और अचूक है:

मानवीय चूक की गुंजाइश खत्म: रोबोटिक प्रणाली थ्री-डी (3D) इमेजिंग के जरिए घुटने के प्रभावित हिस्से का सटीक मापन करती है। इससे कृत्रिम जोड़ (इंप्लांट) बिल्कुल सही जगह पर फिट होता है और हड्डियों को जरूरत से ज्यादा काटने की नौबत नहीं आती।

तेज रिकवरी: इस प्रक्रिया में मांसपेशियों को कम से कम नुकसान पहुंचता है और चीरा बेहद छोटा होता है। इसके चलते ऑपरेशन के दौरान न के बराबर रक्तस्राव (ब्लडिंग) होता है और मरीज को दर्द की शिकायत बहुत कम रहती है। स्थिति यह है कि सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद मरीज बिना किसी सहारे के चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है।

बड़े संस्थानों से ट्रेनिंग लेकर लौटे विशेषज्ञ; मरीजों की जुबानी सफलता की कहानी

इस जटिल प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों ने देश के शीर्षस्थ चिकित्सा संस्थानों से विशेष ट्रेनिंग ली है। डॉ. सोनी के मुताबिक, उनकी टीम ने सफदरजंग अस्पताल (दिल्ली), आरएमएल अस्पताल और फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली से जॉइंट रिप्लेसमेंट की अत्याधुनिक विधाओं में विशेषज्ञता हासिल की है, ताकि सरकारी अस्पताल में आने वाले हर जरूरतमंद को वर्ल्ड-क्लास इलाज मिल सके।

इस नई तकनीक का लाइव और सफल अनुभव खुद मरीजों ने बयां किया है। गांव अजरानी की 65 वर्षीय बुजुर्ग बाला देवी पिछले 14 वर्षों से घुटने के असहनीय दर्द से जूझ रही थीं। सिविल अस्पताल में रोबोटिक ऑपरेशन के बाद उनकी सालों पुरानी लाचारी दूर हो गई है। ऐसी ही कहानी 65 साल की अमरजीत कौर की भी है, जो पिछले 4 साल से चलने-फिरने को तरस रही थीं। 19 मई को हुए उनके सफल रोबोटिक ऑपरेशन के बाद अब वे बिना किसी दर्द के सामान्य रूप से चहलकदमी कर पा रही हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी क्षेत्र में इस तरह की तकनीकों का आना स्वास्थ्य के लोककल्याणकारी ढांचे को मजबूत करता है। इससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी वह इलाज सुलभ हो पा रहा है, जो कभी उसकी आर्थिक पहुंच से कोसों दूर था।

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