ऑस्ट्रेलिया से लौटा कुरुक्षेत्र का लाल: 3 एकड़ में तैयार की हाई-टेक नर्सरी, कमा रहा 1.5 करोड़ सालाना
Mar 22, 2026 12:20 PM
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र का एक छोटा सा गांव निवारसी आज देश के कृषि मानचित्र पर चमक रहा है। कारण हैं यहां के युवा किसान मोहित, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर सोच आधुनिक हो, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि करोड़ों का बिजनेस है। साल 2011 में 3 एकड़ में पॉलीहाउस से शुरुआत करने वाले मोहित ने आज अपनी मेहनत और तकनीक के दम पर 1.5 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाली 'हाई-टेक नर्सरी' खड़ी कर दी है। ऑस्ट्रेलिया से हॉर्टिकल्चर की बारीकियां सीखकर लौटे मोहित ने पारंपरिक खेती के ढर्रे को तोड़कर 'स्मार्ट फार्मिंग' का बीज बोया है।
ग्राफ्टिंग लैब: जहां पौधों को मिलता है 'कवच' और अधिक पैदावार की गारंटी
मोहित की सफलता का सबसे बड़ा राज उनकी हाई-टेक लैब और ग्राफ्टिंग विधि (Grafting Technique) है। हरियाणा में ग्राफ्टिंग के जरिए सब्जी नर्सरी तैयार करने वाली यह संभवतः इकलौती बड़ी इकाई है। मोहित बताते हैं कि उन्होंने 2019-20 में इस नर्सरी की नींव रखी थी। ग्राफ्टिंग विधि में एक मजबूत जड़ वाले पौधे पर दूसरे उन्नत किस्म के पौधे को जोड़ा जाता है। इससे पौधा न केवल रोग-प्रतिरोधक बनता है, बल्कि साधारण पौधों के मुकाबले ज्यादा समय तक और अधिक मात्रा में पैदावार देता है। आज करीब 50,000 किसान मोहित से जुड़े हैं, जो अपना बीज लेकर आते हैं और यहां से तैयार नर्सरी वापस ले जाते हैं।
गांव की महिलाओं के लिए बना सहारा, 30 लोगों को घर के पास मिला काम
मोहित की यह पहल केवल मुनाफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दी है। उनकी इस यूनिट में करीब 30 लोग प्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें गांव की उन महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें काम के लिए पहले शहर या बाहर जाना पड़ता था। अब वे अपने गांव के पास ही सम्मानजनक रोजगार पा रही हैं। मोहित का 3 एकड़ का यह मॉडल बताता है कि जमीन का टुकड़ा छोटा हो या बड़ा, अगर उस पर तकनीक और विज्ञान का लेप लगा दिया जाए, तो वह सोना उगलने लगती है।
हरियाणा ही नहीं, सात राज्यों में है 'निवारसी ब्रांड' की धाक
मोहित द्वारा तैयार किए गए 2 करोड़ पौधे हर साल न केवल हरियाणा के खेतों की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में भी इनकी भारी मांग है। मजबूत जड़ें और बीमारियों से लड़ने की क्षमता के कारण किसान इस नर्सरी पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं। मोहित का कहना है कि उन्होंने फूलों की खेती से सफर शुरू किया था, लेकिन आज सब्जी नर्सरी के जरिए वे किसानों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो रोजगार की तलाश में विदेशों की ओर भागते हैं, जबकि मोहित ने विदेश की तकनीक लाकर अपनी ही माटी को समृद्ध कर दिया।