Kurukshetra News: सस्पेंड होते ही खुली फूड इंस्पेक्टर अंकुर जांगड़ा की कुंडली, गेहूं पर पानी छिड़कने के मामले
Jun 03, 2026 11:22 AM
कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सरकारी अनाज के साथ खिलवाड़ करने का एक बड़ा मामला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाया है। खुले आसमान के नीचे रखे गेहूं के स्टॉक पर पानी की बौछारें छोड़ने के आरोपी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर अंकुर जांगड़ा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। दरअसल, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बीते 22 मई को इस मामले की परतें खोलने के लिए एसडीएम शाहाबाद शंभू राठी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने महज तीन दिन के भीतर अपनी जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट आला अधिकारियों को सौंप दी, जिसमें इंस्पेक्टर की साफ तौर पर गंभीर लापरवाही और मिलीभगत उजागर हुई। निलंबन आदेश के मुताबिक, अब सस्पेंशन पीरियड के दौरान अंकुर जांगड़ा का हेडक्वार्टर सिरसा रहेगा और वे बिना अनुमति जिला नहीं छोड़ पाएंगे।
सस्पेंशन होते ही उखड़े पुराने गड़े मुर्दे, साल 2020 का वो खौफनाक सुसाइड वीडियो
इस ताजा कार्रवाई ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के भीतर पनप रहे भ्रष्टाचार और पुराने विवादों को एक बार फिर हवा दे दी है। इस सस्पेंशन के बाद सबसे ज्यादा चर्चा साल 2020 के उस बहुचर्चित सुसाइड केस की हो रही है, जिसने पूरे महकमे को हिलाकर रख दिया था। तब विभाग के ही एक अन्य इंस्पेक्टर आशीष डांगी ने मौत को गले लगाने से पहले एक बेहद भावुक और सनसनीखेज वीडियो रिकॉर्ड किया था। उस वीडियो में आशीष ने रोते हुए अपने बच्चे से माफी मांगी थी और कहा था कि एक शरीफ इंसान के लिए इस भ्रष्ट सिस्टम में जीना नामुमकिन हो गया है। आशीष डांगी ने अपनी मौत के लिए सीधे तौर पर अंकुर जांगड़ा, प्रवीण कुमार और तत्कालीन डीएफएससी नरेंद्र शेरावत को जिम्मेदार ठहराया था और आरोप लगाया था कि ये लोग 50 हजार की रिश्वत लेने के बाद भी लगातार और पैसों की डिमांड कर रहे थे।
कागजों में फर्जी गार्ड और ट्रांसफर का खेल, 2021 में भी लगे थे गंभीर आरोप
अंकुर जांगड़ा का विवादों से नाता सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। साल 2021 में भी उन पर पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे थे। गांव संघोर के रहने वाले दीपक कुमार ने डीसी को एक लिखित शिकायत सौंपकर बताया था कि वह बाबैन में आउटसोर्सिंग के जरिए सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था। आरोप था कि जब उसने तत्कालीन इंस्पेक्टर अंकित हुड्डा और अंकुर जांगड़ा की मिलीभगत से कागजों में फर्जी सुरक्षा गार्ड दिखाकर सरकारी बजट ठिकाने लगाने के खेल का विरोध किया, तो अंकुर जांगड़ा ने रंजिशन उसका तबादला लाडवा कर दिया और बाद में उसे नौकरी से ही हटवा दिया। हालांकि, इस मामले की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी।
किसान यूनियन के अल्टीमेटम के आगे झुका प्रशासन, पुतला फूंकने की थी तैयारी
इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार तब बढ़ी जब किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अनाज की इस बर्बादी को लेकर शहीद भगत सिंह किसान यूनियन ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया था। यूनियन के पदाधिकारियों ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर आरोपी इंस्पेक्टर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी 5 जून को सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोला जाएगा। किसानों ने मुख्यमंत्री की आंखों पर पट्टी बांधकर उनका पुतला फूंकने का अल्टीमेटम दिया था, जिसका सीधा संदेश था कि सरकार को अपने ही महकमे का भ्रष्टाचार दिखाई नहीं दे रहा है। किसान संगठन के इस तीखे तेवर और बढ़ते सियासी दबाव को देखते हुए ही विभाग ने प्रदर्शन से ऐन पहले इंस्पेक्टर को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया।