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कुरुक्षेत्र में गेहूं घोटाला? सरकारी अनाज पर पानी छिड़कने का वीडियो वायरल, भड़के किसान पहुंचे डीसी दफ्तर

May 22, 2026 11:45 AM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र में सरकारी गोदामों में रखे अनाज की सुरक्षा और उसमें होने वाले कथित घपले को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आलमपुर की जैन राइस मिल में रखे सरकारी गेहूं पर पानी छिड़कने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद किसान संगठनों ने तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। शुक्रवार को 'शहीद भगत सिंह' किसान यूनियन के बैनर तले दर्जनों किसान कुरुक्षेत्र के उपायुक्त (DC) विश्राम कुमार मीणा और मुख्यमंत्री आवास पर सीएम के प्रतिनिधि कैलाश चंद से मुलाकात करने पहुंचे। किसानों का एक ही एजेंडा है—इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

50 किलो की बोरी में निकला 53 किलो वजन, रंगे हाथ पकड़ने का दावा

यूनियन के प्रधान संजू नंबरदार ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि वीरवार को राइस मिल के भीतर एक कर्मचारी को सरकारी गेहूं के चट्टे पर सरेआम पानी का छिड़काव करते हुए देखा गया था। इसका वीडियो बनते ही यूनियन के सदस्य मौके पर पहुंचे और हंगामा शुरू हो गया। किसानों ने मौके पर ही जब शक के आधार पर गेहूं की पांच बोरियों का कांटा करवाया, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। नियमानुसार जिस बोरी का वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए था, उसमें 52 से 53 किलो तक अनाज निकला। किसानों का सीधा आरोप है कि मिलर्स और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से गेहूं का वजन बढ़ाने के लिए यह काला खेल खेला जा रहा था।

'बारिश का बहाना झूठा, डिपो का सड़ा गेहूं खाने को मजबूर होगा गरीब'

मौके पर पहुंचे खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने जब इस मामले को दबाने के लिए दलील दी कि गेहूं बारिश की वजह से गीला हुआ है, तो किसानों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। किसान नेताओं ने साफ कहा कि कुरुक्षेत्र और आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से चिलचिलाती धूप है और बारिश का नामोनिशान नहीं है, ऐसे में आसमान से पानी आने का दावा पूरी तरह हास्यास्पद है। किसानों ने चिंता जताते हुए कहा कि यही भीगा और नमी वाला गेहूं आगे चलकर राशन के डिपो के माध्यम से गरीब और बीपीएल परिवारों में बांटा जाएगा। गोदामों में बंद यह गीला अनाज कुछ ही दिनों में सड़ जाएगा, जो इंसानों के खाने लायक नहीं बचेगा। किसानों ने सवाल उठाया कि मंडियों में खरीद के वक्त तो सरकार नमी के नाम पर किसानों का दाना-दाना रिजेक्ट करती है, तो फिर यहां सरकारी संरक्षण में अनाज को गीला क्यों किया जा रहा है?

विभाग की सफाई: वीडियो की टाइमिंग और कस्टोडियन के दावों पर उलझा पेंच

दूसरी तरफ, प्रशासनिक महकमा इस पूरे मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग के एएफएसओ (AFSO) रामपाल ने बताया कि वीडियो संज्ञान में आने के बाद तुरंत भारतीय खाद्य निगम (FCI) की टीम को मौके पर भेजा गया था। एफसीआई के क्वालिटी मैनेजर शुगन सिंह के मुताबिक, मौके से लिए गए पांच सैंपलों की प्राथमिक जांच में नमी की मात्रा 10.40 प्रतिशत पाई गई है, जो सरकारी पैमाने (अधिकतम 12 प्रतिशत) के भीतर है। हालांकि, मामले में नया मोड़ तब आया जब गोदाम के कस्टोडियन इंचार्ज और इंस्पेक्टर अंकुर जांगड़ा ने दावा कर दिया कि वीडियो में जो चट्टा दिखाई दे रहा है, वैसा कोई स्टैग उनके गोदाम में मौजूद ही नहीं है। विभाग अब इस बात की जांच करवा रहा है कि यह वीडियो कब, कहां और किस मकसद से रिकॉर्ड किया गया था।

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