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कुरुक्षेत्र में HSGMC की महाबैठक आज: वित्तीय संकट में फंसे मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज को बचाने का बनेगा रोडमैप

Jun 04, 2026 11:18 AM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर आज होने जा रही हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की बैठक महज़ एक औपचारिक सांगठनिक मीटिंग नहीं है, बल्कि यह हरियाणा के सिख नेतृत्व की परीक्षा का दिन है। लंबे अदालती विवाद के बाद जिस मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज को कमेटी ने अपने अधिकार क्षेत्र में लिया था, वह आज वित्तीय कुप्रबंधन के चलते वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है और संस्थान को सुचारू रूप से चलाने के लिए कमेटी के पास बजट का भारी टोटा है। प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने साफ कहा है कि चाहे जो मर्जी हो जाए, इस प्रतिष्ठित संस्थान पर ताला नहीं लगने दिया जाएगा, लेकिन जमीन पर ऐसा होता दिखना फिलहाल किसी चुनौती से कम नहीं है।

दादूवाल बनाम झींडा: अंदरूनी खींचतान का साया

इस पूरे विवाद का एक सिरा सिखों की आपसी राजनीति से भी जुड़ा है। कमेटी के पूर्व प्रधान बाबा बलजीत सिंह दादूवाल ने मौजूदा प्रधान झींडा की कार्यशैली पर सीधे सवाल दागे हैं। दादूवाल का आरोप है कि झींडा बिना किसी ठोस जमीनी होमवर्क और प्रशासनिक समझ के इतने बड़े संस्थान को चलाने के दावे कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि अगर आज की बैठक में दादूवाल और उनके समर्थक सदस्य नहीं पहुंचते हैं, तो यह साफ हो जाएगा कि कमेटी के भीतर की दरार और गहरी हो चुकी है। इसके विपरीत, यदि दोनों धड़े एक मेज पर बैठते हैं, तो ही मीरी-पीरी को बचाने का कोई सर्वमान्य फॉर्मूला निकल सकेगा।

जेब खाली, खर्चे भारी; कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

बैठक से ठीक 24 घंटे पहले मीरी-पीरी संस्थान के डॉक्टरों, प्रोफेसरों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट गया। कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जगदीश सिंह झींडा और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सचिव सुखमिंद्र सिंह से मुलाकात कर दोटूक शब्दों में कह दिया है कि बिना वेतन के काम करना अब उनके लिए मुमकिन नहीं है। झींडा ने भी यह माना है कि इस विशाल मेडिकल कॉलेज का मासिक खर्च बेहद ज्यादा है, जबकि इसके मुकाबले कमेटी की आमदनी के स्रोत बेहद सीमित हैं।

तीन दशक पुराना सपना, क्या बची रहेगी पहचान?

उल्लेखनीय है कि मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना साल 1992 के आसपास की गई थी और 1996 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन सिपहसालारों ने इसका निर्माण कार्य शुरू कराया था। इस संस्थान का उद्देश्य न केवल सिखों बल्कि पूरे उत्तर भारत के युवाओं को विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा देना था। आज की बैठक में इस संस्थान को चलाने के लिए किसी नए संचालन मॉडल (ऑपरेटिंग मॉडल), नए डोनर्स से फंडिंग जुटाने और फौरी राहत के तौर पर कर्मचारियों की सैलरी जारी करने के लिए एक आपातकालीन फंड बनाने पर गंभीर विचार-विमर्श होगा।

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