कुरुक्षेत्र में आग का तांडव: कंबाइन की चिंगारी ने फूंकी 15 एकड़ गेहूं की फसल, दाने-दाने को मोहताज किसान
Apr 12, 2026 1:10 PM
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के पिहोवा क्षेत्र में गेहूं की कटाई की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब गढ़ी सिंघा गांव के खेतों से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। रविवार दोपहर जब किसान कंबाइन मशीन से फसल कटवा रहे थे, तभी मशीन से निकली एक छोटी सी चिंगारी सूखी फसल पर जा गिरी। देखते ही देखते आग ने रौद्र रूप धारण कर लिया। पछुआ हवा के तेज झोंकों ने इस आग को इतनी रफ्तार दी कि लपटें पड़ोसी गांव भौर सैयदां की सीमाओं में भी दाखिल हो गईं। इस अग्निकांड ने देखते ही देखते तीन किसानों की करीब 15 एकड़ सुनहरी फसल को काले मलबे में तब्दील कर दिया।
ट्रैक्टरों के साथ रण में उतरे किसान, आग को घेरा
आग की भयावहता देख एक बार तो पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लेकिन गढ़ी सिंघा और आसपास के ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। जैसे ही सूचना फैली, दर्जनों किसान अपने ट्रैक्टर-हल लेकर मौके पर पहुंच गए। किसानों ने जलती हुई फसल के चारों ओर की खड़ी फसल को जोतना शुरू कर दिया ताकि आग को आगे बढ़ने के लिए 'ईंधन' न मिले। किसानों की इस तत्परता की वजह से आग सैकड़ों एकड़ में फैलने से रुक गई। बाद में पिहोवा से पहुंची दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद बची-कुची आग पर पूरी तरह काबू पाया।
हरदीप, चंदन और अजीत के सपने हुए राख
इस हादसे ने कई किसान परिवारों की कमर तोड़ दी है। गढ़ी सिंघा के किसान हरदीप सिंह ने भर्राई आंखों से बताया कि उनकी 7 एकड़ फसल चंद मिनटों में राख हो गई। वहीं, उनके पड़ोसी चंदन सिंह की 4 एकड़ और भौर सैयदां के अजीत सिंह की 4 एकड़ फसल भी इस आग की भेंट चढ़ गई। फसल की कटाई अंतिम चरण में थी और किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार से पुराने कर्ज उतर जाएंगे, लेकिन अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
क्षतिपूर्ति पोर्टल और मुआवजे पर टिकी निगाहें
घटना के बाद से ही पीड़ित किसान प्रशासन से गिरदावरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हरदीप सिंह का कहना है कि कटाई के सीजन में कंबाइन से चिंगारी निकलना एक तकनीकी समस्या है, जिस पर किसान का कोई बस नहीं चलता। उन्होंने सरकार से मांग की है कि विशेष गिरदावरी करवाकर क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से उन्हें तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। स्थानीय प्रशासन ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है ताकि नुकसान का सटीक आकलन कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा सके।