कुरुक्षेत्र रोडवेज की खुली पोल: फटी सीटें और टूटे शीशों के भरोसे सफर, यात्रियों की जान दांव पर
May 21, 2026 10:46 AM
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र रोडवेज विभाग एक तरफ तो शहरवासियों को सुगम और आधुनिक सफर का अहसास कराने के लिए नई गाड़ियां और 'सिटी सर्विस' शुरू करने के बहानों अपनी पीठ थपथपा रहा है। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट और डराने वाली है। कुरुक्षेत्र के नए बस अड्डे पर स्थित मुख्य डिपो में खड़ी गाड़ियों पर नजर डालें, तो सरकारी दावों की हवा निकल जाती है। यहां एचआर-64ए-2014 जैसी कई बसें ऐसी हैं, जो देखरेख के अभाव में कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। सफर के दौरान यात्रियों को आराम देने वाली सीटें अंदर से पूरी तरह फट चुकी हैं, खिड़कियों के न तो शीशे सलामत हैं और न ही उनके हैंडल। हालत यह है कि जिस लोहे के पाइप का सहारा लेकर बुजुर्ग और महिलाएं बस के अंदर चढ़ते हैं, वह भी कई गाड़ियों में टूटकर लटका हुआ है।
फर्स्ट एड बॉक्स गायब, सीढ़ियों के नट ढीले; जान जोखिम में डालकर सफर
रोडवेज की इन बसों में सिर्फ आराम ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के पैमानों को भी पूरी तरह ठेंगा दिखाया जा रहा है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बसों में लगाए जाने वाले फर्स्ट एड बॉक्स तक गायब हैं। सफर को और अधिक जोखिम भरा बना रही हैं बसों की सीढ़ियों के पास लगी लोहे की चादरें, जिनकी तली से नट-बोल्ट निकल चुके हैं। चलती गाड़ी में ये चादरें और पायदान हिलते रहते हैं, जिससे चढ़ते-उतरते वक्त कोई भी मुसाफिर गंभीर हादसे का शिकार हो सकता है। रोडवेज कर्मचारी खुद मानते हैं कि वे इन तकनीकी खामियों और खस्ताहाली को लेकर कई बार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि शिकायत की फाइलें धूल फांक रही हैं और ये कंडम गाड़ियां रोजाना सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं।
"परेशानी भरा है सुगम सफर", यात्रियों ने बयां किया अपना दर्द
रोडवेज बसों में रोजाना सफर करने वाली सवारी शालिनी, वीरभान, संजय और विकास ने विभाग के ढुलमुल रवैए पर गहरा रोष जताया। यात्रियों का कहना है कि सरकार एक तरफ सुगम सफर के बड़े-बड़े विज्ञापन देती है, लेकिन जब जमीनी हकीकत देखें तो फटी सीटों पर बैठना भी दूभर हो जाता है। खिड़कियों के शीशे टूटे होने के कारण मौसम की मार सीधे सवारियों पर पड़ती है। लोगों का कहना है कि डिपो की इस बदहाली से रोडवेज की छवि जनता के बीच लगातार खराब हो रही है। अधिकारियों को दफ्तरों से बाहर निकलकर समय-समय पर बसों का औचक निरीक्षण करना चाहिए, ताकि इन कमियों को वक्त रहते सुधारा जा सके।
खामियां मिलीं तो रूट पर नहीं उतरने देंगे बस: यातायात प्रबंधक
इस पूरे मामले पर जब कुरुक्षेत्र डिपो के यातायात प्रबंधक (Traffic Manager) पवन शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया। पवन शर्मा ने कहा कि बसों की इस हालत को लेकर वे जल्द ही एक विशेष जांच अभियान शुरू करवाने जा रहे हैं। वर्क्स मैनेजर और किलोमीटर स्कीम के तहत चलने वाली जो भी बसें रूट पर हैं, उनके मालिकों और चालकों को समय पर मरम्मत कराने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कड़े लहजे में साफ किया कि यदि किसी भी गाड़ी में यात्रियों की सुरक्षा या सुविधा से जुड़ी कोई कमी पाई गई, तो उस बस को सड़क पर उतारने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी और जिम्मेदार अमले पर सख्त कार्रवाई होगी।